मुंबई: पूर्वी अफ्रीका के देश इथियोपिया में 12,000 साल से सो रहा
हैली गुब्बी ज्वालामुखी अचानक जाग गया है। इसमें हुए विस्फोट का असर मुंबई सहित भारत के कई हिस्सों में भी महसूस किया जा रहा है। ज्वालामुखी से उठा राख का एक विशाल बादल (volcano ash) भारत के हवाई क्षेत्र में पहुंच गया है, जिससे विमानों के संचालन में बड़ी बाधा उत्पन्न हो गई है।
राख के घने बादल के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने समय रहते विमान कंपनियों को प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने, मार्ग बदलने और सतर्क रहने के निर्देश जारी किए। जारी बयान के अनुसार, इसका सबसे अधिक प्रभाव दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के क्षेत्रों में दिख रहा है।
जानकारी के मुताबिक, शताब्दियों से सुषुप्त पड़े ज्वालामुखी में रविवार को लगभग 12,000 वर्षों के बाद विस्फोट हुआ है। विस्फोट से उठी राख लाल सागर को पार करते हुए यमन, ओमान के रास्ते अरब सागर और उत्तर भारत की दिशा में आगे बढ़ी। वर्तमान में राख के घने बादल दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर से गुजर रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि राख बहुत अधिक ऊँचाई पर होने के कारण जमीन पर वायु गुणवत्ता पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है, फिर भी लगातार निगरानी जारी है। राख के खतरे के कारण कई विमान कंपनियों ने उड़ानें रद्द या मार्ग परिवर्तित करना शुरू कर दिया है।
अकासा एयर ने जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी के लिए 24-25 नवंबर की अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। केएलएम रॉयल डच एयरलाइंस ने भी अपनी एम्स्टर्डम-दिल्ली (केएल 871) और दिल्ली-एम्स्टर्डम (KL 872) उड़ान सेवाएं रद्द कर दी हैं। दूसरी ओर, इंडिगो ने यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी है और कई उड़ानों के मार्ग में बदलाव किए हैं। इंडिगो ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि ऐसी खबरें चिंता बढ़ा सकती हैं, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस मामले में डीजीसीए ने सभी विमान कंपनियों को कड़े निर्देश दिए हैं। डीजीसीए ने कहा कि राख वाले क्षेत्रों और ऊँचाई से उड़ानों से बचा जाना चाहिए। डीजीसीए की सलाह में हवाई अड्डों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। इसके अनुसार, हवाई अड्डों को रनवे, टैक्सीवे और एप्रन पर राख की जाँच करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उड़ानें रोक देनी चाहिए। साथ ही, विमान कंपनियों और हवाईअड्डा प्रशासन को उपग्रह चित्रों और मौसम विभाग से लगातार जानकारी लेते रहने को कहा गया है।
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