मुंबई. राजधानी मुंबई हो या महाराष्ट्र के अन्य शहर, बढ़ते ट्रैफिक जाम और प्रदूषण ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने सोमवार को दो ऐतिहासिक फैसले लिए। सरकार ने एक तरफ जहां नए ऑटो रिक्शा परमिट पर रोक लगा दी. तो वहीं अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कई कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए.
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सोमवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य के पांच लाख से अधिक आबादी वाले सभी शहरों में 9 मार्च 2024 से नए ऑटो रिक्शा परमिट जारी करने पर पूर्ण रोक लगा दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला यातायात व्यवस्था को सुधारने और बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए लिया गया है। मंत्री सरनाईक ने कहा, “महाराष्ट्र के कई शहरों में ऑटो रिक्शा की संख्या निर्धारित सीमा को पार कर चुकी है। इससे न केवल सड़कों पर जाम लगता है, बल्कि ध्वनि और वायु प्रदूषण का स्तर भी खतरनाक हो गया है। नागरिकों को सुगम यातायात सुविधा देना हमारी प्राथमिकता है।” सरकार के इन निर्णयों के प्रति रिक्शा चालकों का एक वर्ग खुशी व्यक्त कर रहा है तो वहीं रोजगार की तलाश में ऑटो खरीदने की सोच रहे हजारों युवाओं को बड़ा झटका लगा है।
बांग्लादेशी घुसपैठियों को भी मिले परमिट!
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक लगभग 14 लाख ऑटो रिक्शा परमिट जारी किए जा चुके हैं. मंत्री सरनाईक ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि परमिट वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने बताया, “हमारे पास शिकायतें आई हैं कि एक ही परिवार के कई सदस्यों को परमिट दे दिए गए। सबसे गंभीर बात यह है कि कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से परमिट जारी होने की सूचना है।” उन्होंने बताया कि इन सभी मामलों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। नई परमिट नीति क्या होगी, यह मंत्रिमंडल की अगली बैठक में तय किया जाएगा।
रिक्शा चालकों को बड़ी राहत
परमिट बंद करने के सरकार के फैसले का सबसे ज्यादा स्वागत मुंबई के ऑटो चालकों और मालिकों ने किया है। एक रिक्शा चालक ने बताया कि परमिट खुला होने से कई लोग फर्जी दस्तावेजों के जरिए परमिट हासिल कर लोन पर ऑटो खरीद लेते थे। ये लोग 3-4 साल तो ऑटो चलाते थे, लेकिन बैंक के लोन की किश्त नहीं भरते थे। आखिर में बैटरी, पहिए और कीमती पार्ट्स निकालकर वाहन को सड़क पर लावारिस छोड़ देते थे। उन्होंने कहा, “आज मुंबई उपनगरों में हजारों की संख्या में ऐसे खटारा रिक्शा खड़े हैं, जिससे बैंकों को भारी नुकसान होता है। अब परमिट बंद होने से ऑटो की संख्या सीमित होगी और एक ऑटो को दो लोग दो शिफ्ट (दिन-रात) में चलाएंगे, जिससे चालकों की आमदनी भी बढ़ेगी।”
इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी पर सख्ती
परिवहन मंत्री ने विधान परिषद में बताया कि अवैध रूप से चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं के खिलाफ सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। केवल इलेक्ट्रिक को इजाजत: ‘महाराष्ट्र ई-बाइक टैक्सी नियम 2024’ के तहत सिर्फ पूर्ण रूप से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को ही टैक्सी सेवा की अनुमति होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर उबर इंडिया, रोपन ट्रांसपोर्टेशन और एएनआई टेक्नोलॉजीज (ओला) का मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए जारी अस्थायी लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया गया। अप्रैल 2024 से अब तक राज्यभर में अवैध रूप से चल रहे 130 दोपहिया वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 33 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया है।
‘सरकार का फैसला सही’
भाजपा की मुंबई इकाई के रिक्शा एवं टैक्सी सेल के अध्यक्ष के.के. तिवारी ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “मुंबई में पार्किंग की समस्या विकराल हो गई है। अधिक परमिट होने से ज्यादातर रिक्शा सिर्फ एक शिफ्ट में चलते हैं और बाकी समय सड़कों पर खड़े रहकर जाम बढ़ाते हैं। हम पिछले दो साल से रिक्शा परमिट बंद करने की मांग कर रहे थे।”

इलेक्ट्रिक ऑटो पर भी बैन की मांग
मुंबई ऑटो रिक्शा मेंस यूनियन के अध्यक्ष शशांक राव ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह बैन इलेक्ट्रिक रिक्शा पर भी लगना चाहिए. उन्होंने कहा, “1998 में परमिट बैन किया गया था, जिसे 2014 में फिर से शुरू कर दिया गया. अब मुंबई के उपनगरों में ढाई लाख से ज्यादा ऑटो हो गए हैं. सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए इलेक्ट्रिक ऑटो को परमिट मुक्त रखा है, लेकिन इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या नहीं घटेगी. निजी वाहनों पर भी नियंत्रण के लिए सख्त नियम बनने चाहिए.”

