मुंबई: केंद्र सरकार की श्रमिक-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों के विरोध में गुरुवार 12 फरवरी 2026 को देशभर में हिंदुस्थान बंद का आह्वान किया गया है। इस बंद में मजदूर संगठनों, बैंक कर्मचारियों और किसान संगठनों की व्यापक भागीदारी रहने की संभावना है।
30 करोड़ से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा
देश की 10 से अधिक केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने बंद का आह्वान किया है। आयोजकों का दावा है कि 30 करोड़ से ज्यादा मजदूर और कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल होंगे। बंद का असर बैंकिंग, परिवहन और कुछ सरकारी सेवाओं पर पड़ सकता है।
क्यों बुलाया गया हिंदुस्थान बंद?
नए श्रम कानून, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, मनरेगा की जगह BV-GRG जैसी योजनाएं, निजीकरण, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर श्रमिकों और किसानों में भारी नाराजगी है। संगठनों का आरोप है कि इन नीतियों से श्रमिक अधिकार कमजोर होंगे और रोजगार सुरक्षा पर खतरा बढ़ेगा।
नए श्रम कानूनों का विरोध
श्रमिक संगठनों का कहना है कि नए कानूनों से कर्मचारियों के अधिकार छीने जाएंगे, नौकरी की सुरक्षा खत्म होगी और कंपनियों को कर्मचारियों की छंटनी में अधिक छूट मिलेगी। साथ ही प्रस्तावित सीड बिल, विद्युत संशोधन बिल और SHANTI कानून को वापस लेने तथा मनरेगा को मजबूत करने की मांग की गई है।
इन 10 केंद्रीय संगठनों की भागीदारी
हिंदुस्थान बंद में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं। ये सभी संगठन नए श्रम कानूनों और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस का समर्थन
इस भारत बंद को कांग्रेस पार्टी का भी समर्थन मिला है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन व प्रशासन) एड. गणेश पाटील के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ के निर्देश पर कांग्रेस पदाधिकारियों को आंदोलन में शामिल होने को कहा गया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर और किसान विरोधी हैं।
क्या बंद रहेगा, क्या खुला?
स्कूल-कॉलेज: देशभर में बंद रखने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं।
परिवहन: केरल, कर्नाटक और ओडिशा में सार्वजनिक परिवहन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बैंक: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों ने हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है, हालांकि RBI या बैंकों की ओर से अवकाश की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
सरकारी सेवाएं: कुछ सेवाओं पर आंशिक असर संभव।
कई राज्यों में दिख सकता है व्यापक असर
देशव्यापी इस हड़ताल का प्रभाव कुछ राज्यों में ज्यादा देखने को मिल सकता है। श्रमिक और किसान संगठनों का कहना है कि जब तक नीतियों में बदलाव नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
