बाजार पर मंदी का साया : निवेशकों को खतरे का अलर्ट
मुंबई. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ब्याज दर संबंधी फैसले से आगामी सप्ताह में शेयर बाजार में बड़े भूकंप (भारी उतार-चढ़ाव) की आशंका है, जिससे बाजार पर मंदी का साया मंडरा रहा है. बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इन वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के कारण निवेशकों को अपने पैसे सुरक्षित रखने और सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है. बीते सप्ताह मुंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेन्सेक्स 639.61 अंक (0.84%) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 171.55 अंक (0.72%) टूटकर बंद हुआ था, जो बाजार में मंदी के शुरुआती संकेतों को दर्शाता है.
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का असर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से तय होगी. रिलायगरे ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (SVP) अजीत मिश्रा ने बताया कि अमेरिका-इरान के बीच की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी. ये कारक सीधे तौर पर देश में महंगाई की आशंका, रुपये की स्थिरता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के रुख को प्रभावित करते हैं. वेल्थ-टेक कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोन्मुडी आर. ने भी कहा कि मध्य पूर्व में जारी राजनीतिक हलचल और कच्चे तेल के दाम बाजार को सबसे ज्यादा प्रभावित करेंगे.
आरबीआई की मौद्रिक नीति पर टिकीं निगाहें
घरेलू मोर्चे पर इस सप्ताह की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घटना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक है, जिसके फैसलों की घोषणा शुक्रवार को की जाएगी. स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च हेड संतोष मीणा के अनुसार, बढ़ती महंगाई और बाजार में नकदी (Liquidity) की स्थिति को देखते हुए यह बेहद संवेदनशील समय है. निवेशक इस बात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं कि आरबीआई ब्याज दरों और नीतिगत रुख को लेकर क्या कदम उठाता है.
जीडीपी और पीएमआई के आंकड़े तय करेंगे दिशा
जियोजित इन्वेन्स्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर का मानना है कि निकट भविष्य में भारतीय बाजार की दशा और दिशा दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी, जिसमें पहला आरबीआई की मौद्रिक नीति और दूसरा भारत के जीडीपी (GDP) विकास दर के आंकड़े हैं. इसके अतिरिक्त, सोमवार को जारी होने वाले मे महीने के एचएसबीसी मॅन्युफॅक्चरिंग पीएमआई (PMI) और बुधवार को आने वाले सर्विसेस व कंपोजिट पीएमआई के आंकड़े देश की आर्थिक रफ्तार का संकेत देंगे. साथ ही, 1 जून को जारी होने वाले ऑटो बिक्री के आंकड़ों से वाहन उद्योग में मांग की स्थिति स्पष्ट होगी. विश्लेषकों का कुल मिलाकर यही मानना है कि आगामी सप्ताह चौतरफा चुनौतियों से भरा है, इसलिए निवेशकों को बाजार के इस उतार-चढ़ाव में बेहद सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए.
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