मुंबई. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वर्षा निवास पर नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के संबंध में आयोजित एक बैठक में इन कानूनों के प्रत्येक पहलू के क्रियान्वयन में महाराष्ट्र को देश में अग्रणी बनाए रखने के निर्देश दिए. इस मौके पर उन्होंने कहा कि अपराध रोकथाम में नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन का बेहतर उपयोग किया जा रहा है. उन्होंने यह आशा भी व्यक्त की कि जिन पहलुओं में महाराष्ट्र पिछड़ रहा है, उनके क्रियान्वयन में महाराष्ट्र देश के अन्य राज्यों से आगे रहेगा. बैठक में गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) डॉ. पंकज भोयर, गृह राज्य मंत्री (शहरी) योगेश कदम, मुख्य सचिव राजेश कुमार उपस्थित थे.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अपराध घटित होने के बाद शीघ्र जांच पूरी करने और आरोपियों को दंडित करने के लिए इन कानूनों के क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे निश्चित रूप से आरोपियों को शीघ्र सजा मिल रही है. कानून-व्यवस्था के अनुरूप नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाना चाहिए. कानून के प्रत्येक तत्व को लागू करते समय अन्य राज्यों के साथ तुलना की जानी चाहिए. इसके आधार पर, अपनी स्थिति को समझते हुए, जिस तत्व के क्रियान्वयन में तेजी लाना आवश्यक है, उसे अपनाया जाना चाहिए. सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) प्रणाली पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज एफआईआर इलेक्ट्रॉनिक रूप से अदालत में जानी चाहिए. इस प्रणाली को शीघ्रता से लागू किया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ऐसे निर्देश भी दिए.
60 दिनों में आरोप पत्र की दर बढ़ाएं
सीएम देवेंद्र ने कहा कि आरोप सिद्ध होने के 60 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने की दर बढ़ाई जानी चाहिए. इसके लिए एक स्वतंत्र अधिकारी की नियुक्ति की जानी चाहिए. विभाग को इस तत्व की प्रगति की नियमित समीक्षा करनी चाहिए. जेल प्रशासन के अनुरूप नागपुर और अमरावती में दो अलग-अलग विभाग बनाए जाने चाहिए. उन्होंने नागपुर और वर्धा में नई जेलों के निर्माण के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए. इस अवसर पर ठाणे जेल के निर्माण की भी समीक्षा की गई.
प्रदान करें नागरिक-केंद्रित सेवाएं
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ई-साक्ष्य में एफआईआर संलग्न करने की प्रक्रिया शीघ्रता से पूरी की जानी चाहिए. नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान की जानी चाहिए. अपराध दर्ज होने के बाद, शिकायतकर्ता को संदेश भेजकर उनकी शिकायतों की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए. कानूनों के क्रियान्वयन के संबंध में सभी पुलिस एजेंसियों का प्रशिक्षण पूरा करके समय-समय पर क्षमता निर्माण गतिविधियां लागू की जानी चाहिए. अपराध निवारण में फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की नई मोबाइल वैन का उपयोग किया जाना चाहिए. सभी 251 वैन उपलब्ध कराई जानी चाहिए. बैठक में अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन) राजेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव (गृह) इकबाल सिंह चहल, पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला, बृहन्मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, न्यायिक एवं तकनीकी विभाग के महानिदेशक संजय वर्मा, प्रमुख सचिव (विशेष) अनूप कुमार सिंह, प्रमुख सचिव (विधि एवं न्याय) सुवर्णा केवले, सचिव (चिकित्सा शिक्षा) धीरज कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) निखिल गुप्ता आदि उपस्थित थे।

राज्य में नए आपराधिक कानून की वर्तमान स्थिति संक्षेप में
राज्य में 2 लाख 884 पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है
2148 न्यायालय कक्षों एवं 60 कारागारों में वीडियो संचार प्रणाली उपलब्ध है
घर बैठे शिकायत दर्ज कराने हेतु ई-एफआईआर सुविधा
1 जुलाई 2024 से 30 सितंबर 2025 तक 958 ई-एफआईआर दर्ज
किसी भी थाने में अपराध दर्ज कराने हेतु जीरो एफआईआर सुविधा
1 जुलाई से 12 हजार 398 जीरो एफआईआर
2024 से 30 सितंबर 2025 तक की अवधि में अन्य राज्यों की 2871 एफआईआर शामिल हैं
नए आपराधिक कानून के तहत 30 सितंबर 2025 तक 60 दिनों के भीतर 1 लाख 34 हजार 131 अपराधों में आरोप पत्र दायर किए गए.

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