मुंबई में स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) ने 19 बड़े स्लम क्लस्टरों के पुनर्विकास का खाका तैयार किया है। अंधेरी वेस्ट के गिल्बर्ट हिल के पास 100 एकड़ का प्रोजेक्ट इस योजना का सबसे बड़ा हिस्सा है, जहां लगभग 14,000 झोपड़ियां मौजूद हैं।
डेटा बॉक्स (मुख्य आंकड़े)
कुल प्रोजेक्ट्स: 19
न्यूनतम क्लस्टर साइज: 50 एकड़
स्लम कवरेज: 51% या अधिक
सबसे बड़ा प्रोजेक्ट: अंधेरी वेस्ट (100 एकड़)
प्रभावित झोपड़ियां: ~14,000 (केवल अंधेरी में)
मुख्य इलाके: मांखुर्द, गोवंडी, सायन, वडाला, विक्रोली, गोरेगांव, कांदिवली, बोरीवली
इन इलाकों का होगा विकास
पूर्वी उपनगर: मानखुर्द, गोवंडी, विक्रोली
मध्य मुंबई: सायन, वडाला
पश्चिमी उपनगर: अंधेरी, गोरेगांव, कांदिवली, बोरीवली
योजना ऐसे काम करेगी
SRA क्लस्टरों की पहचान करेगा
हाई-पावर कमेटी से मंजूरी
राज्य सरकार की अंतिम स्वीकृति
टेंडर/जॉइंट वेंचर के जरिए डेवलपर नियुक्ति
इन्हें मिलेगा ऐसा लाभ
स्लम निवासी: पक्के घर, बेहतर पानी, सड़क, सीवर और सुरक्षा
शहर को लाभ: बेहतर शहरी प्लानिंग, ट्रैफिक और भीड़ में कमी, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
डेवलपर्स: बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश का मौका, जॉइंट वेंचर और टेंडर के जरिए भागीदारी
मुख्य चुनौतियां
जमीन मालिकों की सहमति
CRZ क्षेत्रों में पर्यावरण मंजूरी
प्रोजेक्ट में देरी और कानूनी विवाद
निवासियों का अस्थायी पुनर्वास
डेवलपमेंट मॉडल (इन्फोग्राफिक स्टाइल)
➡️ सरकारी एजेंसी + जॉइंट वेंचर
➡️ टेंडर के जरिए निजी डेवलपर
➡️ 40% जमीन वाले डेवलपर को प्राथमिकता (सरकारी मंजूरी के साथ)
जमीन से जुड़े नियम
निजी जमीन मालिकों को 50% वैल्यू के आधार पर विकसित प्लॉट
असहमति पर 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अधिग्रहण
अधिग्रहण लागत डेवलपर द्वारा वहन
संभावित टाइमलाइन
2026: क्लस्टर पहचान और टेंडर प्रक्रिया
2027: मंजूरी और निर्माण की शुरुआत
2028-2032: चरणबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट पूरा होने की संभावना
क्या कहते हैं जानकार?
शहरी विकास विशेषज्ञों के मुताबिक, क्लस्टर आधारित यह मॉडल मुंबई के पुराने SRA प्रोजेक्ट्स की तुलना में ज्यादा प्रभावी हो सकता है, क्योंकि इसमें पूरे इलाके का एक साथ विकास होगा। हालांकि, सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार और डेवलपर्स कितनी पारदर्शिता और गति से काम करते हैं।
ग्राउंड रियलिटी चेक
मुंबई में कई SRA प्रोजेक्ट्स पहले देरी और विवादों में फंस चुके हैं। ऐसे में इस मेगा योजना की असली परीक्षा इसके इंप्लीमेंटेशन और समयबद्धता में होगी। इस तरह से यदि यह योजना सफल होती है, तो यह मुंबई के स्लम पुनर्विकास मॉडल को पूरी तरह बदल सकती है और शहर को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक बना सकती है।
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