मुंबई: रंगदारी देने से इनकार करने वाले बुजुर्ग दंपति पर जानलेवा हमला करने और उन्हें लूटने वाले दो शातिर अपराधियों को मुंबई की एक विशेष अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत दर्ज इस मामले में कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास और 17 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।
घटना जनवरी 2020 की है। दहिसर-पश्चिम के लिंक रोड इलाके में एक बुजुर्ग दंपति रिक्शा पार्किंग चलाकर अपना गुजर-बसर करते थे। मुख्य आरोपी मारू यल्लाप्पा कुंचिकर्वे, जो कि एक आदतन अपराधी है, ने इस दंपति से हफ्ता (रंगदारी) मांग रहा था। लेकिन बुजुर्ग दंपति ने पैसे देने से इनकार कर दिया था। इससे गुस्साए मारू ने अपने साथी सनी सुल्तान सिंह के साथ मिलकर बुजुर्ग दंपति पर चॉपर और चाकू से हमला कर दिया और उन्हें लूट लिया। इस मामले की सुनवाई मुंबई के 57वें न्यायालय में न्यायाधीश एन. आर. प्रधान के समक्ष हुई। एमएचबी पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 387, 392, 323, 506, 504, 34, हथियार कानून और मकोका (एमसीओसीए) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया। अदालत ने प्रत्येक आरोपी पर कानून की विभिन्न धाराओं के तहत कुल मिलाकर 10 साल की जेल और 17 लाख रुपए के भारी जुर्माने की सजा सुनाई।
पुलिस की प्रभावी जांच और पैरवी
इस मामले की सफलता में पुलिस टीम और कानूनी सलाहकारों की अहम भूमिका रही। एसीपी (सहायक पुलिस आयुक्त) सुनील वडके और एमएचबी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हरीश गवली के मार्गदर्शन तथा पीआई (अपराध) धनंजय लिगाडे के नेतृत्व में पीआई अतुल आव्हाड और पीएसआई वसीम शेख की टीम द्वारा की गई मामले की गहन जांच के उपरांत पुलिस की कोर्ट क्लर्क देवलेकर ने भी मामले का निरंतर फॉलो-अप लिया तथा सरकारी वकील विजय मालणकर की अदालत में प्रभावी पैरवी के कारण दोनों आरोपियों को सख्त सजा मिली है। पुलिस की इस कार्रवाई और अदालत का यह सख्त फैसला अपराधियों में खौफ पैदा करने और कानून व्यवस्था के प्रति आम जनता का विश्वास बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
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