‘मुंबई: अकेले रहने वाले बुजुर्ग इन दिनों साइबर सेंधमारों के निशाने पर हैं। साइबर अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर देश भर में वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। ठग वीडियो कॉल के जरिए पुलिस की वर्दी पहनकर संपर्क करते हैं और मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या अवैध कारोबार में शामिल होने का आरोप लगाकर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। “डिजिटल अरेस्ट” नामक ठगी के इस जाल के बारे में मुंबई पुलिस इन दिन बुजुर्गों को जागरूक बनाने के लिए अभियान चला रही है। क्योंकि डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठग लोगों से लाखों-करोड़ों रुपए की ठगी कर रहे हैं।
साइबर अपराधी खासतौर पर अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को फोन या वीडियो कॉल करते हैं। खुद को पुलिस, जांच एजेंसियों या अदालत का अधिकारी बताकर उन्हें डराया जाता है। कई मामलों में पीड़ितों को वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखा जाता है और उनसे पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
563 वरिष्ठ नागरिकों को किया जागरूक
इस तरह बढ़ती साइबर ठगी को देखते हुए मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। पुलिस की टीम इन वरिष्ठ नागरिकों की जानकारी जुटाने के बाद व्यक्तिगत रूप से उनके घर जा रही है और लोगों को जागरूक कर रही है। मुंबई अपराध शाखा के 5 क्षेत्रीय साइबर पुलिस स्टेशनों के 8 पुलिस अधिकारियों और 36 कर्मचारियों ने घर-घर जाकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस टीम ने हाल ही में विशेष अभियान के तहत परिमंडल 11 क्षेत्र में अकेले रहने वाले 563 वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक किया है। टीम ने इस दौरान मराठी और अंग्रेजी भाषा में सूचना पत्रक (पैम्फलेट) भी वितरित किए।

वरिष्ठ नागरिकों ने की पुलिस की सराहना
अभियान के दौरान वरिष्ठ नागरिकों ने मुंबई पुलिस की इस पहल की सराहना की और कहा कि वे अब “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में चला अभियान
यह अभियान मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन् भारती, संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेश बलकवडे, पुलिस उपायुक्त (साइबर क्राइम) पुरुषोत्तम कराड और सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर विभाग) इरफान शेख के मार्गदर्शन में साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा चलाया गया।
“डिजिटल अरेस्ट” से कैसे बचें?
मुंबई पुलिस ने नागरिकों से कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है:
पुलिस, CBI, ED, RBI या कोई भी सरकारी एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती।
कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
किसी भी अज्ञात व्यक्ति का वीडियो कॉल स्वीकार न करें।
ऐसे कॉल के कहने पर कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें।
परिवार के किसी सदस्य के व्यवहार या मूड में अचानक बदलाव दिखे तो उस पर ध्यान दें।
यदि आप डिजिटल अरेस्ट ठगी के शिकार हो जाएं, तो तुरंत परिवार और रिश्तेदारों को जानकारी दें।
शिकायत कहां करें?
अगर आपको “डिजिटल अरेस्ट” से जुड़ा कोई कॉल आता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। 100 या 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या फिर www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
मुंबई पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की तुरंत सूचना दें।
