मुंबई : महाराष्ट्र में अब कोई भी निजी अस्पताल मरीजों को अपने परिसर या खुद से संबद्ध मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा । अन्न व औषध प्रशासन (FDA) ने यह साफ कर दिया है कि मरीजों को किसी भी लाइसेंस प्राप्त दवा विक्रेता से दवा खरीदने का पूरा अधिकार है। इस फैसले से मरीजों को अपनी पसंद की दुकान से दवाएं चुनने की आजादी मिलेगी और शीर्षकों के अनुसार उनकी सक्ती खत्म होगी।
शिकायत मिलने पर जारी हुए सख्त निर्देश
प्रशासन के संज्ञान में यह बात आई थी कि राज्य के कुछ निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों को अस्पताल से ही दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कुछ जगहों पर डॉक्टर मरीजों को प्रिस्क्रिप्शन देने के बजाय उसे सीधे किसी खास मेडिकल स्टोर पर भेज देते थे। इन शिकायतों को देखते हुए एफडीए आयुक्त ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी अस्पताल, डॉक्टर या मेडिकल स्टोर मरीजों को ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं करेगा। इन निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रिस्क्रिप्शन देना और सूचना बोर्ड लगाना हुआ अनिवार्य
नए नियमों के तहत डॉक्टरों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे दवा की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) सीधे मरीज या उनके रिश्तेदारों को सौंपें। इसके साथ ही मरीजों को यह जानकारी देना भी आवश्यक है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीद सकते हैं। सभी संबंधित अस्पतालों को अपने परिसर के मुख्य और दिखाई देने वाले हिस्से में मराठी और अंग्रेजी भाषाओं में सूचना बोर्ड लगाना होगा। इस बोर्ड पर स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि मरीज अस्पताल के मेडिकल से दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं हैं।
अधिकार संरक्षण और शिकायत दर्ज कराने की अपील
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा है कि नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित दवाएं उचित दरों पर उपलब्ध कराना प्रशासन का कर्तव्य है। दवाएं कहां से खरीदनी हैं, यह उपभोक्ता का बुनियादी अधिकार (Right of Choice) है और प्रशासन इसके संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई अस्पताल पर्ची देने से मना करता है या किसी खास दुकान से दवा लेने का दबाव बनाता है, तो इसकी शिकायत तुरंत एफडीए या संबंधित विभागीय कार्यालय में दर्ज कराएं।
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