मुंबई: स्वामी तीनों जग का, मां बिना भिखारी,’ नागपुर में यह कहावत एक बार फिर यथार्थ होती नजर आ रही है। दुनिया के एक विकसित देश में ऊंचा पद, सम्मान और सत्ता पाने के बाद भी मां की ममता की तलाश इंसान को कहां ले आती है, इसका भावुक उदाहरण नीदरलैंड्स के हीमस्टेड शहर के मेयर फाल्गुन बिनेन्डिज्क के जीवन में देखने को मिल रहा है।
फाल्गुन बिनेन्डिज्क का जन्म 10 फरवरी 1985 को नागपुर मेडिकल कॉलेज में हुआ था। उस समय उनकी जन्मदात्री मां मात्र 21 वर्ष की अविवाहित युवती थीं। सामाजिक बदनामी और दबाव के डर से उन्होंने तीन दिन के नवजात शिशु को नागपुर की मातृसेवा संघ संस्था को सौंप दिया।
दत्तक जीवन से मेयर बनने तक का सफर
बाद में एक दंपति ने फाल्गुन को गोद लिया और उन्हें नीदरलैंड्स ले गए। वहीं उनकी शिक्षा, करियर और राजनीतिक यात्रा आगे बढ़ती गई। समय के साथ वे हीमस्टेड शहर के मेयर बने। लेकिन इतनी सफलता के बावजूद उनके दिल में जन्मदात्री मां की कमी हमेशा बनी रही।
मां के लिए तीसरी बार पहुंचे भारत
मां की इसी तलाश ने फाल्गुन को एक बार फिर भारत, खासकर नागपुर तक पहुंचा दिया। इससे पहले वे 2017 और 2024 में भी भारत आ चुके हैं। यह उनकी तीसरी भारत यात्रा है, जो भावनाओं से भरी हुई है।
मातृसेवा संघ से भावुक मुलाकात
नागपुर पहुंचते ही फाल्गुन ने मातृसेवा संघ की पूर्व अधीक्षक मंगला भुसारी से मुलाकात की। 40 साल पहले इसी महिला ने इस अनाथ शिशु का नाम ‘फाल्गुन’ रखा था और मां की तरह स्नेह दिया था।
मंगला भुसारी भावुक होते हुए कहती हैं, “वही बच्चा आज विदेश में मेयर बनकर मेरे सामने खड़ा है, यह शब्दों में बयान करना मुश्किल है। अब बस यही इच्छा है कि उसे उसकी मां मिल जाए।”
प्रशासन युद्ध स्तर पर सक्रिय
फाल्गुन की इस भावनात्मक खोज को अब प्रशासनिक समर्थन भी मिल गया है। जिल्हाधिकारी डॉ. विपीन इटनकर के निर्देश पर जिला बाल संरक्षण कक्ष, महिला एवं बालकल्याण विभाग, मनपा और स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गए हैं।
40 साल पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
करीब 40–41 वर्ष पुराने अस्पताल के जन्म रिकॉर्ड, दत्तक प्रक्रिया की फाइलें और मातृसेवा संघ के रजिस्टर युद्ध स्तर पर खंगाले जा रहे हैं। रिकॉर्ड में फाल्गुन की जन्मतिथि और मां का नाम दर्ज है, लेकिन उस समय सामाजिक भय के कारण पता अधूरा होने से तलाश चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

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