मुंबई में दिखी पूर्वांचल की सांस्कृतिक छटा
मुंबई। मुंबई विश्वविद्यालय के कालिना कैंपस स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शनिवार को आयोजित नौवें पूर्वांचल महोत्सव “माटी-9 मुंबई” में पूर्वांचल की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक चेतना का भव्य संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का जीवंत उदाहरण: फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई में कई पीढ़ियों से रह रहे पूर्वांचल के परिवारों ने महाराष्ट्र की संस्कृति को पूरी तरह अपनाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा का वास्तविक स्वरूप मुंबई में देखने को मिलता है।
फडणवीस ने कहा कि देश के आध्यात्मिक केंद्र पूर्वांचल और आर्थिक राजधानी मुंबई का यह संगम केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और विकास यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल ने देश को संत, साहित्यकार, वैज्ञानिक, विचारक और कर्मयोगी दिए हैं, जिनका योगदान राष्ट्र निर्माण में अहम रहा है।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पूर्वांचल की विभूतियों को सम्मानित किए जाने पर खुशी जताते हुए कहा कि इन व्यक्तित्वों से देशभर के पूर्वांचलवासियों को प्रेरणा मिलेगी।
पूर्वांचल भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र: मनोज सिन्हा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि पूर्वांचल केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की चेतना, संस्कार और सांस्कृतिक ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की मिट्टी ने सदियों से देश को अध्यात्म, संघर्ष और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा दी है।
उन्होंने कहा कि आज देश के विभिन्न हिस्सों में पूर्वांचल के लोग अपनी प्रतिभा और कर्मनिष्ठा से भारत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
माटी संस्था पूर्वांचल की पहचान को दे रही नया मंच
माटी संस्था के संरक्षक और वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि संस्था लगातार उन प्रतिभाओं को सम्मानित कर रही है, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी है।
माटी संस्था के संयोजक आसिफ आज़मी ने कहा कि संस्था पूर्वांचल की संस्कृति, साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि संस्था जल्द ही दिल्ली-एनसीआर में पूर्वांचल सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
नौ विभूतियों को मिला ‘माटी सम्मान-9’
महोत्सव के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली नौ हस्तियों को “माटी सम्मान-9” से सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में रामाश्रय पांडे, कमोडोर डॉ. अशोक यादव, शारदा प्रसाद सिंह, वी.के. सिंह, अजय हरिनाथ सिंह, कुशल टंडन, आर.जे. सिंह, डॉ. शैलेश श्रीवास्तव और राहुल लल्लन तिवारी शामिल रहे।
युवाओं के लिए कौशल विकास पर विशेष संवाद
उद्घाटन सत्र में पूर्वांचल के युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसरों पर विशेष संवाद आयोजित किया गया। इसमें कस्टम्स विभाग के प्रमुख आयुक्त पंकज सिंह (IRS) और केईएम अस्पताल के डीन डॉ. हरिश एम. पाठक ने युवाओं का मार्गदर्शन किया।
कविता, संगीत और लोक संस्कृति ने बांधा समां
कवि सम्मेलन में असलम हसन, शकील आज़मी, प्रताप सोमवंशी, आलोक श्रीवास्तव ‘अविरल’, डॉ. सागर, स्वप्निल तिवारी, ऋतेश राजवाड़ा और विश्वदीप जीस्त ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. सच्चिदानंद जोशी की चर्चित एकल प्रस्तुति “अपनी-अपनी काशी” कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। वहीं पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अवधी और भोजपुरी लोकगीतों की प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को पूर्वांचल की सांस्कृतिक सुगंध से सराबोर कर दिया।

पूर्वांचली व्यंजनों का भी लोगों ने लिया आनंद
कार्यक्रम में चित्रकार मंती शर्मा, अनिल शर्मा और प्रवीण पटेल ने चित्रकला के माध्यम से पूर्वांचल की सांस्कृतिक आत्मा को कैनवास पर उकेरा। महोत्सव के समापन पर लोगों ने बाटी-चोखा, पूड़ी-सब्जी, लौंगलता, ठेकुआ समेत पारंपरिक पूर्वांचली व्यंजनों का स्वाद लिया। मुंबई में आयोजित यह महोत्सव पूर्वांचल की संस्कृति, सामाजिक ऊर्जा और राष्ट्रीय योगदान का यादगार उत्सव बन गया।

