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वाराणसी पहुंची महाकुंभ के श्रद्धालुओं की भीड़ : उत्तर रेलवे ने किया नियंत्रण का ऐतिहासिक इंतजाम  

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वाराणसी. महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यूपी की काशी नगरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, कैंट रेलवे स्टेशन पर ऐसा लग रहा था कि मानो त्रिवेणी संगम की भीड़ यहीं पर उमड़ आई हो. जबकि वाराणसी रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं के आने और जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा. ऐसे में भीड़ के कारण संभावित अनहोनी को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्टेशन निदेशक अर्पित गुप्ता और उनकी पूरी टीम पिछले दो सप्ताह से दिन रात अपने काम में जुटी रही. जरूरत के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए रेलवे की तरफ से 12 गाड़ियां प्रतिदिन चलाई गई. भीड़ को डाइवर्ट करने के लिए वाराणसी जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर पर बना छोटा फुट ओवर ब्रिज अस्थाई तौर से बंद कर उसे वन वे कर दिया गया. वाराणसी जंक्शन के एग्जिट प्वाइंट से लेकर प्रवेश द्वार तक रेल प्रशासन की तरफ से सुरक्षा रक्षकों की ऐसी फौज खड़ी की गई ताकि भीड़ को नियंत्रित करके सही दिशा में मोड़ा जा सके. इस दौरान वाराणसी रेलवे स्टेशन पर डीआरएम सचिंद्र मोहन शर्मा और स्टेशन निदेशक अर्पित गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस और सुरक्षा बल की टीम 24 घंटे मुस्तैद रही, जिसमें समय-समय पर रेल मंत्री का मार्गदर्शन मिलता रहा.
डीआरएम सचिंद्र मोहन शर्मा के अनुसार, वाराणसी को कुंभ के दौरान 102 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ. यूटीएस और पीआरएस का लोगों ने जमकर इस्तेमाल किया. इससे यात्रियों को टिकट के लिए खिड़की पर इंतजार करने की नौबत नहीं आई. इसमें वर्दीधारी रेलकर्मियों ने खुद रेल यात्रियों की मदद की, जिससे लोगों को टिकट मिलने में आसानी हुई. महाकुंभ स्नान करने वाले श्रद्धालुओं ने प्रयागराज के बाद काशी विश्वनाथ का रुख किया, जिसके लिए करीब 606 गाड़ियां सिर्फ प्रयागराज से वाराणसी और लखनऊ के दरमियान चलाई गई. ये सभी ट्रेनें 22 डिब्बों की थी. नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे ने भी कई गाड़ियों का परिचालन किया. इस दौरान करीब 3600 कर्मचारी निरंतर अपनी सेवा देने में लगे रहे, जिसमें 1800 आरपीएफ के कर्मचारी शामिल रहे. उनके लिए टेंट सिटी का भी निर्माण किया गया जो काशी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे स्थानों में बनाए गए थे.
आरपीएफ ने किया सराहनीय कार्य
डीआरएम सचिंद्र मोहन शर्मा ने पत्रकार परिषद के दौरान पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि इस बार के महाकुंभ में यंग जनरेशन की संख्या सबसे ज्यादा देखने को मिली, जिनकी उम्र 30 से 35 साल के बीच थी. रेलवे का मेडिकल विभाग भी हजारों यात्रियों की सेवाओं में दिन रात लगा रहा. किसी भी स्थिति से निपटने के लिए इस दौरान बड़ी संख्या में एंबुलेंस की तैनाती की गई थी. जिसमें डॉक्टरों की टीम श्रद्धालुओं की सेवा में 24 घंटे उपलब्ध थी. इससे लोगों को बड़ी सहूलियत मिली. ड्यूटी के दौरान आरपीएफ के कमांडेंट ने अपने कर्मचारियों की रेगुलर काउंसलिंग की. उन्होंने समय-समय पर आरपीएफ के जवानों को निर्देशित किया कि किन परिस्थितियों में क्या करना चाहिए? इससे रेलवे स्टेशन पर लगातार उमड़ रही भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिली. इस दौरान आरपीएफ, जीआरपी के जवान पूरे रेलवे परिसर में मौजूद रहे ताकि यात्री ट्रेन के करीब जल्दबाजी में ना जा सके और न ही पटरियों पर उतरकर अपनी जान जोखिम में डाल सके.
सीसीटीवी कैमरों से विशेष निगरानी
सुरक्षा के मद्देनजर वाराणसी में 103 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, जिसकी बड़ी बारीकी से निगरानी की गई. सीसीटीवी कैमरे की मदद से यात्रियों की सुरक्षा की निगरानी लगातार जारी रही. पुरुष रेल कर्मियों के साथ साथ महिला रेलकर्मी को भी विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया था. यही कारण रहा कि वाराणसी रेलवे स्टेशन पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सफर करने में आसानी हुई. गौरतलब है कि इस बार सरकार की तरफ से पहले ही ये ऐलान कर दिया गया था कि लगभग 55 करोड़ की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ यूपी के प्रयागराज में महाकुंभ का स्नान करने पहुंच सकती है, जिसको देखते पूरा प्रशासनिक अमला सड़कों पर उतर आया और पूरी ताकत के साथ व्यवस्था में जुट गया. रेलवे स्टेशन से लेकर सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद था. किसी भी श्रद्धालुओं को रेलवे में सफर के दौरान परेशानी न हो इसलिए बुनियादी सुविधाओं का खास ख्याल रखा गया. बहरहाल इस बार के महाकुंभ में उमड़ी भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन की ओर से कई चीजों की समीक्षा की गई ताकि आने वाले समय में यदि कोई बड़ा आयोजन होता है तो प्रशासनिक तैयारियों में कोई कोर कसर बाकी न रहे.

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