मुंबई. महाराष्ट्र सरकार ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राज्य में एनालॉग (Non-Dairy) पनीर के उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार का कहना है कि जांच में बड़ी संख्या में ऐसे नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो रहा था.
35.4 प्रतिशत नमूने निकले मानकों के विपरीत
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच राज्यभर से पनीर के 308 नमूनों की जांच की गई. इनमें 109 नमूने नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए. इनमें 79 नमूने सब-स्टैंडर्ड और 30 नमूने असुरक्षित घोषित किए गए. जांच में कई नमूनों में दूध की वसा की जगह वनस्पति आधारित वसा और अन्य गैर-डेयरी तत्वों के उपयोग की पुष्टि हुई.
होटल और रेस्टोरेंट में भी उपयोग पर रोक
सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग, क्लाउड किचन और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में भी एनालॉग पनीर के उपयोग, भंडारण और परोसने पर रोक लगा दी है. अधिकारियों को राज्यभर में विशेष जांच अभियान चलाने, नमूने लेने, संदिग्ध माल जब्त करने और आवश्यकता पड़ने पर उसे नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं.
उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) ने कहा कि सुरक्षित और शुद्ध भोजन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को गुमराह करने और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार शून्य सहनशीलता की नीति अपनाएगी. आदेश का उल्लंघन करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
महाराष्ट्र में एक साल के लिए एनालॉग पनीर पर बैन : जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा फैसला
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