तीन दशकों से फरार अपराधियों पर पुलिस का कसता शिकंजा
मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के उत्तर परिमंडल 3 (Zone 3) के तहत आने वाले समतानगर (Samta Nagar) और डिंडोशी (Dindoshi) पुलिस स्टेशनों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। लगभग 30 वर्षों से कानून की पकड़ से दूर रहे दो गंभीर आरोपियों का सुराग पुरानी मतदाता सूची, स्थानीय पूछताछ और गुप्त जानकारी की मदद से लगाकर उन्हें आखिरकार पुलिस के शिकंजे में ले लिया गया है। इस पूरी कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि गंभीर अपराध करके लंबे समय तक फरार रहने के बावजूद कोई भी आरोपी कानून की कस्टडी से हमेशा के लिए नहीं बच सकता है।
समतानगर पुलिस ने 29 साल बाद दबोचा भगोड़ा आरोपी
समतानगर (Samta Nagar) पुलिस स्टेशन में वर्ष 1997 में दर्ज अपराध संख्या 347/1997 (धारा 363, 366, 376 भादंवि) का आरोपी सुकेन शिवसागर विश्वकर्मा (Suken Shivsagar Vishwakarma), उम्र 53 वर्ष, पिछले 29 सालों से फरार चल रहा था और अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित किया था। पुलिस ने आरोपी के पुराने ठिकानों की नए सिरे से जांच शुरू की और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर उसका लगातार पीछा किया। पक्की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम ने 3 सितंबर 2026 को जीवा ला पाड़ा, ठाकुर विलेज, कांदीवली पूर्व, मुंबई (Jiva La Pada, Thakur Village, Kandivali East, Mumbai) से उसे गिरफ्तार कर लिया। इस अभियान में पुलिस उपनिरीक्षक अंकुश गायकवाड़ (Ankush Gaikwad), भीमेश कोटला (Bhimesh Kotla) और उनकी टीम ने प्रमुख भूमिका निभाई।
बेहरामपाड़ा के घने इलाके में डिंडोशी पुलिस की सघन जांच
डिंडोशी (Dindoshi) पुलिस स्टेशन के अपराध संख्या 146/1995 (धारा 376 (1) भादंवि) में वांछित आरोपी मोहम्मद मुस्तफा सैयद (Mohammad Mustafa Sayyed), उम्र 48 वर्ष, पिछले 30 सालों से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। अपराध के समय वह नाबालिग था और उसके खिलाफ जुवेनाइल कोर्ट डोंगरी, मुंबई (Juvenile Court Dongri, Mumbai) ने सर्च वारंट जारी किया था। आरोपी बांद्रा पूर्व के बेहरामपाड़ा (Behrampada, Bandra East) स्थित डी/1/70, लाकड़ावाला गली (D/1/70, Lakdawala Galli) का निवासी था, जो एक अत्यंत घनी झुग्गी बस्ती होने के कारण उसकी पहचान कर पाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम था।
स्थानीय पूछताछ और मतदाता सूची के विश्लेषण से मिली सफलता
डिंडोशी (Dindoshi) पुलिस टीम ने बांद्रा (Bandra) के बेहरामपाड़ा (Behrampada) में लगातार चार दिनों तक गहन अभियान चलाया। पुलिस ने स्थानीय पुराने नागरिकों, दुकानदारों, कारखानेदारों और स्थानीय मस्जिदों व मदरसों के प्रतिनिधियों से प्रत्यक्ष पूछताछ की। पुरानी मतदाता सूची और उपलब्ध दस्तावेजों के गहराई से किए गए विश्लेषण के बाद आरोपी की सही पहचान स्थापित हुई, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर जुवेनाइल कोर्ट डोंगरी (Juvenile Court Dongri) में पेश किया गया। इस पूरी कार्रवाई में हवलदार घुगे (Ghuge), कांस्टेबल पाटिल (Patil) और महिला कांस्टेबल सोनावणे (Sonawane) ने विशेष योगदान दिया।
पुरानी मतदाता सूची से मिला सुराग: पुलिस के शिकंजे में आए 30 साल से फरार आरोपी
Article Top Ad
Article Inline Ad
Article Bottom Ad