मुंबई: सार्वजनिक गणेशोत्सव से पैदा होने वाले सामाजिक एकजुटता, उत्साह और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने तथा गणेशोत्सव को वैश्विक विरासत का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने पहल शुरू की है। इसके लिए ‘बाप्पा डॉट ऑर्ग’ (bappa.org) डिजिटल मंच तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने मंगलवार को द एशियाटिक सोसायटी (The Asiatic Society) में इस मंच का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने घर के गणपति उत्सव की कहानी ‘बाप्पा डॉट ऑर्ग’ पर अपलोड की। उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से महाराष्ट्र के करीब 40 हजार गांवों में गणेशमूर्ति, गणेशोत्सव की परंपराओं और उनसे जुड़ी विशेष कहानियों को दुनिया के सामने लाया जाएगा। देश-विदेश में भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूपों, भक्तों के अनुभवों और समय के साथ बदलती गणेश भक्ति की जानकारी भी मंच पर उपलब्ध होगी।
यूनेस्को का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास
सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशिष शेलार (Ashish Shelar) ने कहा कि मंच के माध्यम से घरों और सार्वजनिक मंडलों से जुड़ी ‘गणेशकथाओं’ को एकत्र कर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। गणेशोत्सव की परंपराओं, रीति-रिवाजों, आस्था और विशेष कहानियों को एक मंच देने के साथ महाराष्ट्र की इस समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की ओर यूनेस्को (UNESCO) का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
‘बाप्पा रथ’ को दिखाई हरी झंडी
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘बाप्पा रथ’ नामक राज्य सांस्कृतिक चित्ररथ को हरी झंडी दिखाई। सर जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट (Sir J. J. School of Art) के विद्यार्थियों और शिल्पकारों द्वारा बनाई गई 12 फुट ऊंची मोदक की कलाकृति रथ का प्रमुख आकर्षण है। इस मोदक को विभिन्न स्थानों पर ले जाकर गणेशोत्सव से जुड़ी कहानियों और सांस्कृतिक परंपराओं को सामने लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री सहायता निधि में 51 लाख रुपये
कार्यक्रम में श्रीपाद आष्टेकर (Shripad Ashtekar) ने मुख्यमंत्री सहायता निधि के लिए 51 लाख रुपये का चेक मुख्यमंत्री फडणवीस को सौंपा। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य विभाग और ईफ्लैग कॉर्प प्राइवेट लिमिटेड (eFlag Corp Pvt. Ltd.) के बीच समझौता भी हुआ। सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव किरण कुलकर्णी (Kiran Kulkarni) सहित अन्य अधिकारी और मुंबईकर नागरिक उपस्थित थे।
गणेशोत्सव को वैश्विक विरासत का दर्जा दिलाने का संकल्प : 40 हजार गांवों की गणेशकथाएं होंगी साझा
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