मुंबई : महाराष्ट्र (Maharashtra) सरकार ने राज्य के 304 तहसीलों में सूखे की स्थिति को देखते हुए फसल नुकसान, पेयजल, पशुओं के चारे, रोजगार और विद्यार्थियों की शिक्षा तक हर पहलू पर राहत और रियायतों की व्यापक व्यवस्था की है। इसी कारण यह कहा जा सकता है कि संकट की घड़ी में अन्नदाता के पीछे सरकार मजबूती से खड़ी है।
खेती पर टिकी अर्थव्यवस्था और सरकार की जिम्मेदारी
महाराष्ट्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था खेती पर आधारित है। किसान के खेत में खड़ी फसल से उसके परिवार के सपने, बच्चों की पढ़ाई की उम्मीद, रोजमर्रा के खर्च और अगले सीजन की तैयारी जुड़ी होती है। बारिश कम होने से जब आंखों के सामने फसल झुलसने लगती है, तो उसका असर पूरे किसान परिवार पर पड़ता है। ऐसे में संकट की गंभीरता को पहचानकर तुरंत मदद करना, उपलब्ध संसाधनों का नियोजन करना और किसानों का भरोसा बनाए रखना राज्य सरकार की अहम जिम्मेदारी बन जाती है।
खरीफ सीजन 2026 में महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अपर्याप्त बारिश से सूखे जैसे हालात बने हैं। मराठवाड़ा (Marathwada), विदर्भ (Vidarbha), पश्चिम महाराष्ट्र (Western Maharashtra) और राज्य के अन्य भागों में बारिश की अनियमितता का असर फसलों की बढ़वार, उत्पादन और ग्रामीण जीवन पर दिखने लगा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के नेतृत्व में सरकार ने हालात का प्रत्यक्ष जायजा लेने, प्रभावित क्षेत्रों के सर्वेक्षण और किसानों व ग्रामीण परिवारों को राहत देने वाले उपायों के क्रियान्वयन पर जोर दिया है।
सूखा सिर्फ कम बारिश नहीं
सूखा केवल कम बारिश की स्थिति नहीं है। यह पानी की उपलब्धता, मिट्टी की नमी, फसलों की हालत, जलाशयों के स्तर तथा पानी और चारे की जरूरतों को प्रभावित करने वाली व्यापक प्राकृतिक आपदा है। कुछ जगहों पर बुवाई के बाद बारिश न होने से फसलों की बढ़वार रुक जाती है। कुछ जगहों पर फूल आने या फलियां भरने जैसी अहम अवस्था में पानी की कमी से उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका पैदा हो जाती है।
सूखे का असर खेत की मेड़ पर ही नहीं रुकता। उपज घटने से किसान के हाथ में आने वाला पैसा कम हो जाता है और खेतिहर मजदूरों को काम मिलना घट जाता है। पशुओं के लिए चारे और पानी की समस्या खड़ी होती है और पेयजल की किल्लत बढ़ सकती है। घर का रोजमर्रा का खर्च, कर्ज की किस्तें और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना भी मुश्किल हो सकता है। इसलिए सूखे पर विचार करते समय फसल नुकसान के साथ किसान, खेतिहर मजदूर, पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सभी घटकों को ध्यान में रखना जरूरी होता है। इसी व्यापक दृष्टिकोण से राज्य सरकार ने इस बार कई उपाय तय किए हैं। इनका मकसद किसान को केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि उसके परिवार की बुनियादी जरूरतें सुरक्षित रखना और अगले सीजन के लिए जरूरी सहारा देना भी है।
शासन निर्णय से राहत और रियायतों का कवच
सूखे का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने सूखा प्रबंधन संहिता 2016 (Drought Management Code 2016) के अनुसार कार्रवाई की। कृषि आयुक्त (Commissioner of Agriculture) ने खरीफ सीजन 2026 की समीक्षा कर रिपोर्ट सौंपी। उसके आधार पर 26 सितंबर 2026 को शासन निर्णय जारी किया गया। इसके तहत राज्य के 265 तहसीलों में सूखे की स्थिति घोषित कर ‘ट्रिगर-1’ (Trigger-1) यानी पहला चरण लागू किया गया। इससे प्रभावित तहसीलों में सूखा निवारण के लिए जरूरी प्रशासकीय कार्रवाई और विशेष रियायतें लागू करने का रास्ता खुल गया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को सरकार ने 39 और तहसीलों में सूखा घोषित किया।
इस निर्णय का महत्व केवल सूखा घोषित करने में नहीं, बल्कि संकट के अलग-अलग पहलुओं पर एक साथ प्रतिक्रिया देने के दृष्टिकोण में है। किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए भू-राजस्व में छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन और खेती से जुड़े कर्जों की वसूली पर रोक जैसे उपाय शामिल हैं। कृषि पंपों के बिजली बिल में भी रियायतें दी गई हैं। इससे पहले 7.5 हॉर्स पावर तक के कृषि पंपों का बिजली बिल माफ किया गया था। शासन निर्णय में बताई गई रियायत उससे अधिक क्षमता वाले पंपों पर भी लागू होगी। साथ ही टंचाईग्रस्त घोषित गांवों में किसानों के कृषि पंपों की बिजली आपूर्ति नहीं काटी जाएगी।
सूखे का असर किसानों के बच्चों की पढ़ाई पर न पड़े, इसके लिए विद्यार्थियों का परीक्षा शुल्क माफ करने का निर्णय भी लिया गया है। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए रोजगार गारंटी के कामों के मानदंड शिथिल कर अधिक से अधिक काम शुरू करने पर जोर दिया गया है। जरूरत वाली जगहों पर टैंकर से पेयजल पहुंचाना, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना, जल संरक्षण के काम शुरू करना और किसान तथा खेतिहर मजदूर परिवारों को पर्याप्त अनाज की आपूर्ति करना भी निर्णय में शामिल है।
बारह तरह के उपायों और रियायतों को देखें तो सरकार ने सूखे को केवल कृषि समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट माना है। किसान के हाथ से फसल जाने के बावजूद उसके परिवार की जीविका का आधार न ढहे, बच्चों की पढ़ाई न रुके और पशु भूखे न रहें, इसी उद्देश्य से कई स्तरों पर मदद का कवच बनाया जा रहा है। फसल नुकसान की आर्थिक मदद तय करने के लिए प्रत्यक्ष पंचनामे, फसलों की स्थिति का आकलन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
एक नजर में राहत उपाय
राज्य सरकार के अनुसार 304 तहसीलों के कुल 37 हजार 496 गांव राहत और रियायतों के दायरे में हैं। सूखाग्रस्त तहसीलों के किसानों को दिवाली से पहले राहत देने के लिए प्रत्येक के खाते में 5 हजार रुपये जमा करने का निर्णय लिया गया है। सूखे से हुए नुकसान के 90 प्रतिशत पंचनामे पूरे हो चुके हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग (Food, Civil Supplies and Consumer Protection Department) के जरिये अब तक 74 प्रतिशत अनाज का वितरण हो चुका है।
जल स्रोतों के सुदृढ़ीकरण, नाला गहरीकरण और जल संरक्षण के कामों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया है। 75 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी पेयजल योजनाओं को तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सूखाग्रस्त गांवों की आंगनवाड़ियों (Anganwadi) को टैंकर से प्राथमिकता के साथ पानी देने के लिए ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) और जल आपूर्ति समितियों से समन्वय किया जा रहा है। सूखाग्रस्त तहसीलों के 2 लाख 40 हजार 365 विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क माफ किया गया है।
गन्ना कटाई और ईंट भट्ठा मजदूरों के प्रवासी परिवारों के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के लिए पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की गई हैं। ‘गाळमुक्त धरण, गाळयुक्त शिवार’ अभियान को गति दी गई है। VB-G RAM G योजना के तहत कामों के प्रकारों की संख्या 318 से बढ़ाकर 375 की गई है, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम चुने जा सकें। चारा उगाने के जरिये ग्रामीण मजदूरों को रोजगार देने और पशुधन के लिए हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर है।
खेत की मेड़ तक पहुंचा सक्रिय नेतृत्व
किसानों की परेशानियां समझने के लिए खुद खेतों में जाकर निरीक्षण करना और उनसे संवाद करना सरकार की प्रतिक्रिया का अहम हिस्सा रहा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लातूर (Latur), धाराशिव (Dharashiv), सोलापुर (Solapur) और वाशिम (Washim) जिलों के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर खेतों में जाकर फसलों का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से बारिश की मात्रा, बारिश में पड़े अंतराल, फसलों की बढ़वार, उत्पादन में संभावित गिरावट और पानी की उपलब्धता की जानकारी ली।
लातूर जिले के जाऊ (Jau) और खरोसा (Kharosa), धाराशिव जिले के मलकापुर (Malkapur) और करजखेड़ा (Karajkheda), सोलापुर जिले के बार्शी (Barshi) तहसील के धानोरे (Dhanore) तथा वाशिम जिले के म्हसला (Mhasla), मोहगव्हाण (Mohagavhan) और जऊळका (Jaulka) में निरीक्षण के दौरान फसल नुकसान की तीव्रता साफ दिखी। कई जगह सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा पाया गया।
मुख्यमंत्री ने किसानों को ढांढस बंधाते हुए स्थिति की गंभीरता स्वीकार की और भरोसा दिया कि सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने फसल नुकसान के लिए मदद की भूमिका स्पष्ट की। किसानों को यह भी बताया गया कि सूखे से निपटने में निधि की कमी नहीं होने दी जाएगी, पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और पशुओं के लिए चारे-पानी की व्यवस्था की जाएगी।
इन दौरों का महत्व केवल प्रत्यक्ष निरीक्षण तक सीमित नहीं है। किसानों की व्यथा सीधे सुनने से प्रशासकीय रिपोर्टों के आंकड़ों को जमीनी हकीकत का आधार मिलता है। स्थानीय स्तर की दिक्कतें, किसानों की तात्कालिक जरूरतें और मदद पहुंचाने में आने वाली बाधाओं की जानकारी निर्णय प्रक्रिया में शामिल हो पाती है। संकट के समय सरकार साथ है, यह भावना किसानों में जगाने के लिहाज से भी ऐसे संवाद का विशेष महत्व है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने भी सूखे जैसी स्थिति का जायजा लेकर किसानों को राहत का भरोसा दिया। उन्होंने अकोला (Akola) जिले के बालापुर (Balapur) तहसील के धम्म (Dhamma) और व्याळा (Vyala) गांवों में फसल नुकसान की समीक्षा की। इसके अलावा बुलढाणा (Buldhana) जिले के खामगांव (Khamgaon) तहसील के कलोरी (Kalori) और मोताला (Motala) तहसील के खडकी खामखेड (Khadki Khamkhed), रोहिणखेड (Rohinkhed) और टाकळी (Takli) गांवों में जाकर किसानों से संवाद किया। बारिश में लंबे अंतराल से तुअर, सोयाबीन और अन्य फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए उन्होंने किसानों से हिम्मत न हारने को कहा। उन्होंने भरोसा दिया कि राज्य सरकार अधिकतम मदद करेगी और उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार (Sunetra Ajit Pawar) ने भी बीड (Beed), परभणी (Parbhani) और नांदेड़ (Nanded) जिलों का दौरा कर किसानों से संवाद किया। उन्होंने उनकी दिक्कतें और व्यथा जानते हुए सरकारी मदद को लेकर भरोसा दिया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नेतृत्व की ओर से की जा रही यह समीक्षा सूखे के सवाल को समग्रता से देखने के प्रयास का हिस्सा है।
समीक्षा बैठकें: निर्णय से क्रियान्वयन तक
सूखा निवारण के काम में प्रत्यक्ष दौरों जितनी ही अहम जिला और संभाग स्तर की समीक्षा बैठकें हैं। सूखे का असर हर इलाके में अलग हो सकता है। कहीं पेयजल की समस्या गंभीर होती है, कहीं पशुओं के लिए चारा जुटाना चुनौती बनता है, तो कहीं फसल नुकसान के साथ रोजगार की जरूरत बढ़ जाती है। इसलिए स्थानीय हालात की विस्तृत समीक्षा कर उसके अनुसार उपायों की योजना बनाना जरूरी होता है।
इसी पृष्ठभूमि में राज्य के विभिन्न जिलों में पालक मंत्री (Guardian Minister), जिलाधिकारी (District Collector), कृषि विभाग, राजस्व विभाग, जिला परिषद (Zilla Parishad) और अन्य संबंधित एजेंसियों की भागीदारी से बैठकें हो रही हैं। इनमें वर्षा की स्थिति, पेयजल की उपलब्धता, जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के तहत कामों की प्रगति, खेती की मौजूदा स्थिति, फसल पंचनामे, पशुओं के चारे और रोजगार के कामों की समीक्षा की जा रही है। कुछ बैठकें प्रत्यक्ष और कुछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हो रही हैं। अलग-अलग विभागों की जानकारी जुटाकर जरूरी फैसले लेने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने स्तर पर भी स्थिति की समीक्षा कर जिलाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों के पंचनामे तुरंत पूरे करने के निर्देश दिए हैं। फसलों की स्थिति दर्ज करते समय तस्वीरें और जीपीएस निर्देशांक जुटाकर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया अहम साबित हो रही है। इससे नुकसान का वस्तुनिष्ठ रिकॉर्ड, मदद के लिए जरूरी सबूत और प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
केंद्र सरकार से भी मदद की पैरवी
राज्य में सूखे की व्यापकता और उससे पैदा चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार से समन्वय भी जरूरी है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात कर महाराष्ट्र की सूखे की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य के 304 तहसीलों में सूखा घोषित किया गया है और किसानों को राहत देने के लिए कई उपाय चल रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (National Disaster Response Fund, NDRF) से केंद्र की आर्थिक मदद की मांग भी की गई।
केंद्र से मदद के लिए पैरवी जारी है और राज्य सरकार ने अपने स्तर पर उपाय जारी रखे हैं। सूखाग्रस्त इलाकों का सर्वेक्षण, फसल नुकसान की दर्ज और जरूरी प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया इस लिहाज से अहम है। इसके अलावा केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम ने भी सूखे की स्थिति और फसल नुकसान का प्रत्यक्ष जायजा लिया। पानी की किल्लत, फसलों की स्थिति, पशुओं के चारे और अन्य संबंधित बातों की समीक्षा कर मदद के लिए जरूरी वस्तुस्थिति समझी गई।
304 तहसील: आगे के आकलन के लिए भी दरवाजे खुले
राज्य सरकार के 26 सितंबर 2026 के शासन निर्णय के तहत 265 और 14 अक्टूबर 2026 के निर्णय के तहत 39, यानी कुल छह राजस्व संभागों के 304 तहसीलों को सूखे जैसी स्थिति की सूची में शामिल किया गया है। इनमें छत्रपति संभाजीनगर (Chhatrapati Sambhajinagar) संभाग के 76, अमरावती (Amravati) संभाग के 56, नाशिक (Nashik) संभाग के 52, नागपुर (Nagpur) संभाग के 52, पुणे (Pune) संभाग के 50 और कोंकण (Konkan) संभाग के 18 तहसील शामिल हैं।
पानी, चारा, रोजगार और अनाज का नियोजन
सूखे से निपटने के लिए केवल आर्थिक मदद काफी नहीं होती। आने वाले कुछ महीनों में पेयजल, पशुओं के चारे, अनाज की उपलब्धता और रोजगार का नियोजन निर्णायक होगा। उपलब्ध जलाशयों के पानी का उपयोग करते समय पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है। जरूरत के अनुसार टैंकर से पानी देना, बंद पड़ी जल आपूर्ति योजनाएं शुरू करना और जलाशयों की मरम्मत तथा गाद निकालने के काम हाथ में लेना जैसे उपायों से आगे की किल्लत की तीव्रता कम की जा सकेगी।
पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। पशुधन ग्रामीण परिवार की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है, इसलिए चारे और पानी के अभाव में उसका नुकसान न हो, इसके लिए नियोजन चाहिए। इसी तरह जल संरक्षण और रोजगार सृजन के काम बड़े पैमाने पर शुरू होने से ग्रामीण मजदूरों को आमदनी का सहारा मिल सकता है। किसान और खेतिहर मजदूर परिवारों को पर्याप्त अनाज की आपूर्ति से उनकी रोजमर्रा की जरूरतों का दबाव घटेगा।
किसानों को फसल बीमा और सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाना, फसल ऋण संबंधी रियायतों का क्रियान्वयन करना और जरूरी आर्थिक मदद समय पर उपलब्ध कराना भी उतना ही अहम है। खेती की आय घटने पर भी परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को सहारा मिले, इसके लिए सभी विभागों को समन्वय से काम करना आवश्यक है।
दिवाली से पहले खाते में 5 हजार रुपये
राज्य के 304 तहसीलों में सूखे के कारण किसानों को दिवाली से ठीक पहले राहत के तौर पर उनके खातों में 5 हजार रुपये की अग्रिम सहायता जमा की जाएगी। इसका शासन निर्णय 28 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया है। पेयजल उपलब्ध रहे, इसके लिए पानी के अवैध दोहन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य के 304 तहसीलों में सूखा घोषित है और अब इन तहसीलों में सूखा राहत उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी।
किसानों को भरोसा देती सरकार
सूखे का संकट बड़ा है और इसके असर कई स्तरों पर महसूस होंगे। ऐसे में किसान को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर मिलने वाली मदद, पानी का सही नियोजन और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए जरूरी सहारा चाहिए। सरकार की घोषित राहत योजनाएं, जिला स्तरीय बैठकें, प्रत्यक्ष निरीक्षण दौरे, पंचनामों की प्रक्रिया और केंद्र से मदद के लिए की गई पैरवी, इन सभी प्रयासों का अंतिम उद्देश्य यही है कि संकट का बोझ अकेले किसान परिवार पर न पड़े।
महाराष्ट्र का अन्नदाता कई संकटों का सामना कर फिर खड़े होने की ताकत रखता है। उसकी मेहनत को उचित सहारा मिलना, उसके परिवार के भविष्य को सुरक्षा मिलना और अगले सीजन के लिए उसका भरोसा कायम रहना जरूरी है। राज्य सरकार इसी दिशा में प्रयास कर रही है।
लेखक: वर्षा फड़के – आंधले, उप निदेशक (समाचार), सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय
सूखे के संकट में किसानों को सरकार का सहारा!
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