मुंबई : बारामती विमान हादसे के दौरान पूर्व उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के बाद शरद पवार (Sharad Pawar) सहित उनकी पार्टी एनसीपी (NCP) के कई नेता बार बार कह रहे थे कि निधन से पहले अजीत दोनों एनसीपी के विलय के लिए गंभीरतापूर्वक प्रयास कर रहे थे। लेकिन तब अजीत की एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे विलय की चर्चा के तमाम दावों को खारिज कर रहे थे। लेकिन उन्हीं तटकरे ने शुक्रवार को खुद को झूठा साबित कर दिया। तटकरे ने ये सच कबूल कर लिया कि अजीत दोनों एनसीपी के विलय का प्रयास कर रहे थे।
राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) के दोनों गुटों का विलय 12 फरवरी (12 February) को होना तय था, लेकिन 28 जनवरी (28 January) को विमान हादसे में अजीत पवार (Ajit Pawar) के निधन के बाद पूरी राजनीतिक स्थिति बदल गई। यह बड़ा दावा एनसीपी (अजीत पवार) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे (Sunil Tatkare) ने किया है। उनके इस बयान से महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में विलय को लेकर फिर अटकलें तेज हो गई हैं।
अजीत ने की थी पूरी तैयारी
तटकरे (Tatkare) ने एक साक्षात्कार में कहा कि अजीत पवार (Ajit Pawar) के जीवित रहते दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस (Nationalist Congress) के विलय को लेकर निश्चित रूप से चर्चा हुई थी। विलय किस तरह होगा, इस पर भी अजीत पवार (Ajit Pawar) ने अपनी भूमिका स्पष्ट की थी। उनके मुताबिक, अजित पवार (Ajit Pawar) की इच्छाशक्ति के कारण 12 फरवरी (12 February) को दोनों दल एक हो सकते थे।
10 तारीख के बाद होगी चर्चा
इस बीच राकां (NCP) के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल (Praful Patel) ने मुंबई (Mumbai) के ब्रीच कैंडी अस्पताल (Breach Candy Hospital) में शरद पवार (Sharad Pawar) से मुलाकात की। इस दौरान शरद पवार (Sharad Pawar) ने 10 तारीख के बाद साथ बैठकर चर्चा करने की बात कही। इस मुलाकात के बाद दोनों गुटों के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
वडेट्टीवार और देशमुख ने उठाए सवाल
कांग्रेस (Congress) नेता विजय वडेट्टीवार (Vijay Wadettiwar) ने अजीत पवार (Ajit Pawar) गुट में दो धड़े बनने और बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की आशंका जताई है। वहीं, शरद पवार (Sharad Pawar) गुट के अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) ने तटकरे (Tatkare) के बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब पहले विलय की चर्चाओं से इनकार किया जा रहा था, तो अब अचानक यह दावा क्यों किया जा रहा है। देशमुख (Deshmukh) ने मौजूदा परिस्थितियों में दोनों गुटों के एक होने को मुश्किल बताया।
अजीत होते तो 12 फरवरी को हो जाता दोनों राकां का विलय : तटकरे ने अब कबूला सच
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