मुंबई: ओशिवरा पुलिस थाना क्षेत्र में वर्ष 2004 में दर्ज एक गंभीर मामले में 22 वर्षों से फरार चल रहे आरोपी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से फरार आरोपी की तलाश के लिए अदालत द्वारा स्थायी गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। गुप्त सूचना और लगातार निगरानी के आधार पर पुलिस ने आरोपी को विलेपार्ले इलाके से गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया।
वर्ष 2004 के मामले में था वांछित
ओशिवरा पुलिस थाना में वर्ष 2004 में अपराध क्रमांक 1201/2004 के तहत पीटा (PITA) अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 7(1)(सी) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले का आरोपी राजेंद्र शिवराम शिंदे (49) पिछले 22 वर्षों से फरार चल रहा था। मामले की सुनवाई शिवड़ी न्यायालय में केस क्रमांक 1158/PW/2015 के तहत चल रही है।
अदालत ने जारी किया था स्थायी गैर-जमानती वारंट
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए मुंबई के माझगांव सत्र न्यायालय ने उसके खिलाफ स्थायी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट (Standing Non-Bailable Warrant) जारी किया था। अदालत ने पुलिस को आरोपी का पता लगाकर उसे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए थे।
पुनर्विकास के कारण पुराना पता हो गया था बेकार
पुलिस ने आरोपी के रिकॉर्ड में दर्ज पते पर जांच की, लेकिन स्थानीय लोगों से पता चला कि संबंधित झोपड़पट्टी क्षेत्र को वर्ष 2012-13 में पुनर्विकास के लिए हटा दिया गया था। इसके कारण आरोपी का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था और उसकी तलाश लगातार चुनौती बनी हुई थी।
गुप्त सूचना से मिला अहम सुराग
जांच के दौरान पुलिस को एक गुप्त मुखबिर से जानकारी मिली कि आरोपी ने वर्ष 2005 में अपना कमरा बेच दिया था और किसी अन्य स्थान पर रहने चला गया था। इस सूचना के आधार पर निगरानी दल ने विभिन्न स्रोतों और खबरी तंत्र की सहायता से जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि आरोपी विलेपार्ले क्षेत्र के एक नए पते पर रह रहा है।
गोपनीय निगरानी के बाद हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने आरोपी पर गोपनीय रूप से नजर रखना शुरू किया। 3 जून 2026 को निगरानी के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति संबंधित इलाके में घूमता दिखाई दिया। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में उसने अपना नाम राजेंद्र शिवराम शिंदे बताया। आगे की जांच में पुष्टि हुई कि वही वर्ष 2004 के मामले में फरार चल रहा आरोपी है। इसके बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर लिया।
न्यायालय में किया गया पेश
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 3 जून 2026 को मुंबई के माझगांव न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
जांच दल की भूमिका रही अहम
इस कार्रवाई को सफल बनाने में ओशिवरा पुलिस की विशेष टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच दल में सहायक पुलिस निरीक्षक (API) तुषार बाविस्कर, सहायक उपनिरीक्षक (ASI) सुनील सालुंखे, हेड कॉन्स्टेबल महेश सालोखे तथा पुलिस कॉन्स्टेबल महेंद्र भोये शामिल थे। उनकी लगातार मेहनत और तकनीकी व खुफिया जानकारी के समन्वय से 22 वर्ष पुराने मामले के फरार आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता मिली।

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