मुंबई. महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों के बहुप्रतीक्षित चुनावों का बिगुल बज गया है. राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त दिनेश वाघमारे ने मंगलवार को पत्रकार परिषद में 246 नगर परिषदों व 42 नगर पंचायतों के चुनावी कार्यक्रम का ऐलान कर दिया. इसके साथ ही संबंधित नगर परिषद एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में चुनावी आचार संहिता लागू कर दी गई है. इन नगर परिषद एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में 2 दिसंबर को वोटिंग होगी और 3 दिसंबर को रिजल्ट की घोषणा होगी.
राज्य चुनाव आयुक्त वाघमारे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को 31 जनवरी 2026 तक सभी निकाय चुनाव को पूरा कराने की अंतिम समय-सीमा दी है. नगर परिषद व नगर पंचायत चुनाव के बाद मुंबई, पुणे, ठाणे समेत 29 शहरों के नगर निगम के चुनाव की घोषणा की जाएगी. उन्होंने कहा कि राज्य के 147 नगर पंचायत में से 42 नगर पंचायत के लिए चुनाव होंगे. बाकी 105 नगर पंचायत का कार्यकाल अभी तक पूरा नहीं हुआ है.
निष्पक्ष-पारदर्शी चुनाव कराने को प्रतिबद्ध
आयुक्त वाघमारे ने कहा कि आयोग ने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की पूरी तैयारी कर ली है. हमारी योजना सभी नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों को समयबद्ध और शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराना है. हालांकि विपक्ष ने वोटर्स लिस्ट में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए इसे दुरुस्त करने की मांग की है. उनकी मांग है कि वोटर्स लिस्ट से फर्जी मतदाताओं को हटाने के बाद ही चुनाव कराए जाने चाहिए . हालांकि चुनाव आयोग ने इन मांगों को दरकिनार करते हुए चुनाव की घोषणा कर दी है.
वीवीपैट का प्रावधान नहीं
ये सारे चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के जरिए कराए जाएंगे. इस चुनाव में वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट का प्रावधान नहीं होगा.
पूरा चुनावी कार्यक्रम
10 नवंबर से नामांकन शुरू
17 नवंबर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि
18 नवंबर से नामांकन की जांच
21 नवंबर तक बिना अपील वाले मामलों नामांकन वापस लिए जा सकेंगे
25 नवंबर तक अपील वाले मामलों में नामांकन वापस लिए जा सकेंगे
26 नवंबर से चुनाव चिन्ह का आवंटन
02 दिसंबर को वोटिंग
03 दिसंबर को चुनाव परिणाम की घोषणा
डबल स्टार से फर्जी वोटिंग पर लगाम
फर्जी मतदान रोकने के लिए चुनाव आयोग ने एक टूल बनाया गया है, जिसमें वोटर लिस्ट में डबल नाम वाले वोटर के नाम के आगे दो ⭐ ⭐ (स्टार) बने होंगे. ऐसे दो बार या जो जगहों पर नाम वाले वोटर जब वोट देने जाएंगे तो मतदान अधिकारी उन मतदाताओं से संपर्क कर जानकारी हासिल करेंगे. साथ ही ऐसे मतदाता से डिक्लेरेशन लिया जाएगा. ताकि वह दूसरी जगह मतदान न करे. महाराष्ट्र में विपक्ष लगातार फर्जी वोटरों का मुद्दा उठा रहा है. राज्य चुनाव आयोग ने मतदाताओं की पारदर्शिता और सुविधा के लिए एक मोबाइल ऐप जारी करने की घोषणा भी की है. इस ऐप में उम्मीदवारों और मतदाताओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध होगी. इन चुनावों के लिए 1 जुलाई की मतदाता सूची का उपयोग किया जाएगा. 1 जुलाई से 15 अक्टूबर तक कोई पूरक सूची नहीं होगी. इन चुनावों में पात्र मतदाताओं की संख्या 1.7 करोड़ है तथा 13,355 मतदान केन्द्र होंगे.
चुनाव खर्च की सीमा बढ़ाई गई
नगर अध्यक्ष पद के लिए चुनाव खर्च की सीमा 15 लाख रुपए तय किए गए हैं. जबकि सदस्य पद के 12 लाख रुपए खर्च किए जा सकेंगे. राज्यभर में चुनाव प्रक्रिया के लिए 288 चुनाव अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे. जबकि 66,775 चुनाव कर्मचारी तैनात किए जाएंगे. प्रत्येक उम्मीदवार के लिए जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा.
वोटरों की सुविधा के लिए कदम
वोटरों की सुविधा के लिए वेबसाइट में एक खोज यानी सर्च की सुविधा है जहाँ मतदाता अपना नाम और केंद्र खोज सकते हैं. मोबाइल ऐप के माध्यम से नाम और केंद्र खोजने की व्यवस्था है और इसमें उम्मीदवार के बारे में जानकारी भी उपलब्ध होगी.
विभागवार चुनाव विवरण
कोंकण विभाग: 27
नाशिक विभाग: 49
छत्रपति संभाजीनगर विभाग: 52
अमरावती विभाग: 45
नागपुर विभाग: 55
बॉक्स
कुल मतदाता: 1 करोड़ 60 लाख
मतदान केंद्र: 13,155
अध्यक्ष पद के लिए खर्च सीमा: 15 लाख रुपए
सदस्य पद के लिए खर्च सीमा: 12 लाख रुपए
वोटर लिस्ट से चुनाव आयोग ने पल्ला झाड़ा
राज्य चुनाव आयोग ने जहां मंगलवार को निकाय चुनावों की घोषणा कर दी, वहीं दिल्ली स्थित केंद्रीय चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत लेकर पहुंचे महाविकास आघाड़ी में शामिल शिवसेना (यूबीटी) सांसद अनिल देसाई, मनसे नेता बाला नांदगांवकर और कांग्रेस नेता अतुल लोंढे को मायूसी हाथ लगी. माविआ के नेताओं ने आयोग के अधिकारियों को बताया कि महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट में काफी गड़बड़ियां हैं और फर्जी वोटरों के नाम दर्ज हैं. एसआईआर कराने से बेहतर है कि मतदाता सूची की जांच कर डुप्लिकेट वोटरों के नाम हटाए जाएं. वोटर लिस्ट सही किए बिना निकाय चुनाव न कराए जाएं. लेकिन आयोग ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि महाराष्ट्र के वोटर लिस्ट का मामला हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. इसकी जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की है. गौरतलब हो कि इससे पहले राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त वाघमारे ने मंगलवार को मुंबई में पत्रकार परिषद में कहा था कि हम लोकसभा और विधान सभा चुनाव के लिए बनाई गई केंद्रीय चुनाव आयोग की ही मतदाता सूची के आधार पर चुनावी तैयारी करते हैं. जबकि केंद्रीय चुनाव आयोग ने इसे राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़ा मामला बताकर अपने हाथ खड़े कर लिए हैं.
इससे महाविकास आघाड़ी के नेताओं को निराश होकर लौटना पड़ा.
पत्रकार परिषद की क्लिप देखकर मुझे विश्वास हो गया है कि चुनाव आयोग सिर्फ संविधान में स्वतंत्र है. यह सत्ताधारियों के हाथों की कठपुतली बन गया है.
– राज ठाकरे, अध्यक्ष – महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना
निर्वाचन आयोग का कामकाज ‘दस नंबरी’
चुनाव आयोग यह कह रहा है कि वह डुप्लीकेट और ट्रिप्लीकेट मतदाताओं के नामों के आगे ‘स्टार’ लगाएगा, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आयोग उन नामों को सूची से हटाकर मतदाता सूची को पूरी तरह से दुरुस्त क्यों नहीं कर रही है. इसका उत्तर आयोग नहीं दे रहा है. आयोग का यह कामकाज ही ‘दस नंबरी’ है और वह सरकार के दबाव में काम कर रहा है.
– हर्षवर्धन सपकाल, अध्यक्ष – कांग्रेस महाराष्ट्र प्रदेश
