अंजलि दमानिया का दावा
मुंबई: सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने ‘देवदत्त सहकारी पर्यटन व परिवहन संस्था’ को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस संस्था का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए एक शेल कंपनी के रूप में किया जा रहा है। इसी फर्जी संस्था को भाजपा नेता प्रवीण दरेकर द्वारा संचालित मुंबई बैंक से 2 हजार गाड़ियों के लिए कर्ज देने की घोषणा की गई है। दमानिया ने इस पूरे मामले में ‘देवा भाऊ टैक्सी’ योजना के बहाने राजनीतिक फायदे के लिए सरकारी तंत्र और जनता के पैसों के दुरुपयोग का दावा किया है।
फर्जी हस्ताक्षरों और शेल कंपनी होने का आरोप
अंजलि दमानिया के अनुसार, इस संस्था की स्थापना 4 दिसंबर 2001 को हुई थी, लेकिन पिछले 25 वर्षों में इसके पास एक भी गाड़ी नहीं है और न ही इसमें कभी चुनाव हुए। वर्ष 2018 में चुनाव न कराने का कारण संस्था ने लिखित में कोविड लॉक डाउन बताया, जो कि पूरी तरह हास्यास्पद है क्योंकि लॉकडाउन 2020 में लगा था। संस्था के 28 सदस्यों के हस्ताक्षर फर्जी होने का संदेह है, जिसमें एक ही व्यक्ति के अलग-अलग वर्षों के हस्ताक्षरों में भारी विसंगतियां पाई गई हैं।
शून्य बैलेंस और 2 हजार गाड़ियों के कर्ज की घोषणा
दमानिया ने बताया कि यह संस्था ‘सी’ श्रेणी में आती है और इसकी वित्तीय स्थिति बेहद खराब है। वर्ष 2023-24 में इसका शुद्ध लाभ मात्र 941 रुपए था। मुंबई बैंक में इस संस्था के खाते में वर्तमान में शून्य रुपए का बैलेंस है। बिना किसी व्यवसाय और खाली बैंक खाते के बावजूद प्रवीण दरेकर ने इस संस्था को मुंबई बैंक से 2 हजार गाड़ियों के लिए लोन देने की घोषणा कर दी है, जो आम जनता और सहकारी समितियों के पैसे का सरासर दुरुपयोग है।
देवा भाऊ टैक्सी’ का नाम और राजनीतिक स्वार्थ
दमानिया ने केंद्र सरकार की ‘भारत टैक्सी’ योजना को दरकिनार कर इसे ‘देवा भाऊ टैक्सी’ नाम देने पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक महिमा मंडन के लिए ऐसा किया गया है। उन्होंने मांग की कि ओला-उबर के विकल्प के रूप में आने वाली इस सेवा का नाम ‘सामान्य की टैक्सी’ या ‘महाराष्ट्र टैक्सी’ होना चाहिए। इसके अलावा, संस्था को सायन के प्रतीक्षा नगर में पुलिस स्टेशन के लिए आरक्षित एक बड़ा भूखंड आवंटित किए जाने पर भी उन्होंने राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।

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