कमिश्नर को पत्र लिखकर प्रस्ताव रद्द करने की मांग की
मुंबई : शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के विधायक और युवासेना सचिव वरुण सतीश सरदेसाई ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के स्कूलों के भूखंडों को पीपीपी मॉडल के तहत निजी शैक्षणिक संस्थाओं को सौंपने के प्रस्ताव पर तीव्र आपत्ति जताई है. इस विषय में उन्होंने बीएमसी आयुक्त को एक पत्र लिखकर इस नीति को आम मुंबईकरों के हितों के खिलाफ बताया है और प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है.
निजीकरण से सामान्य मुंबईकरों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
विधायक वरुण सरदेसाई ने कहा है कि आज के समय में निजी शिक्षा आम नागरिकों के लिए लगातार महंगी होती जा रही है. ऐसी स्थिति में बीएमसी का यह पीपीपी मॉडल मुख्य रूप से केवल निजी संस्थाओं के मुनाफे के लिए काम करता हुआ दिखाई दे रहा है. उन्होंने चिंता व्यक्त की कि मुंबई की अत्यंत मूल्यवान सार्वजनिक जमीनों का उपयोग करने के बाद भी महानगरपालिका को इससे बेहद कम राजस्व प्राप्त होगा, जो कि जनता के पैसे का नुकसान है.
मराठी माध्यम के स्कूलों के अस्तित्व पर संकट
मुंबई में मराठी माध्यम के स्कूल पहले से ही बड़े पैमाने पर बंद हो रहे हैं और इस मुद्दे को विधानसभा में भी प्रमुखता से उठाया गया है. पूर्व के अनुभव बताते हैं कि बीएमसी स्कूलों में निजी संस्थाओं के हस्तक्षेप के कारण कई सरकारी स्कूल कमजोर हुए या पूरी तरह बंद हो गए. ऐसे में महानगरपालिका की शिक्षा व्यवस्था में निजी क्षेत्रों की बढ़ती भागीदारी सार्वजनिक शिक्षा तंत्र के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है.
स्कूलों के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देने की जरूरत
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज आवश्यकता स्कूलों को निजी हाथों में सौंपने की नहीं, बल्कि उन्हें अधिक सक्षम और आधुनिक बनाने की है. आदित्य ठाकरे जी के कार्यकाल में बीएमसी स्कूलों में नई तकनीक, डिजिटल सुविधाएं और आधुनिक शिक्षा प्रणाली लाने पर विशेष बल दिया गया था, जिससे नगर निकाय के स्कूल प्रतिस्पर्धी बने थे. सरकार को उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सामान्य मुंबईकरों के लिए सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.

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