देश में पहली बार कृषि-एआई नीति लागू
मुख्यमंत्री ने लॉन्च किए कई डिजिटल एप्लिकेशन और प्लेटफॉर्म
मुंबई : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में महाराष्ट्र ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज यहां जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘एआई फॉर एग्री 2026’ वैश्विक परिषद का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने घोषणा की कि कृषि क्षेत्र के लिए अलग से एआई नीति बनाने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है। इस परिषद के जरिए राज्य सरकार ने किसानों के जीवन को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
किसान होंगे सशक्त, एआई बनेगा साथी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास का माध्यम बनाया है। महाराष्ट्र इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों के लिए ‘महा-विस्तार एआई’ नामक डिजिटल साथी विकसित किया है। इसके जरिए किसान अपनी भाषा में सवाल पूछ सकते हैं और फसल, मौसम, कीट प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 30 लाख से अधिक किसान इस एप्लिकेशन से जुड़ चुके हैं।
हर किसान तक पहुंचेगी डिजिटल सेवा
मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि हर किसान के पास स्मार्टफोन नहीं है, इसलिए सरकार ने बहुभाषी और वॉयस-आधारित डिजिटल सुविधाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि हर तालुका और हर गांव तक यह सेवा पहुंचे। महा एआई इनोवेशन सेंटर के जरिए विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और उद्योगों को एक मंच पर लाकर हम एक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं।”
केंद्र सरकार ने सराही महाराष्ट्र की पहल
कार्यक्रम में विज्ञान और तकनीक राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र की एग्री एआई पॉलिसी दूसरे राज्यों के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत में एआई को नैतिकता, पारदर्शिता और समावेशिता से जोड़ा गया है। फसल उत्पादन का अनुमान, बीमारियों का शीघ्र निदान और संसाधनों का कुशल उपयोग एआई की मदद से संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि देशभर के किसानों के लिए 22 भारतीय भाषाओं में एआई आधारित तकनीक विकसित की जा रही है।
किसान केंद्र में, तकनीक हाथ में
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि तकनीक चाहे जितनी भी आधुनिक हो, उसका केंद्र किसान ही होना चाहिए। महाराष्ट्र सरकार ने 2025-29 के लिए एआई आधारित कृषि नीति के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। उन्होंने बताया कि ‘महाविस्तार’ एप के जरिए किसानों को निजी सलाह, बाजार भाव और मौसम की जानकारी मिल रही है।
लॉन्च किए गए नए डिजिटल टूल्स
इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण डिजिटल एप्लिकेशन और प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए।
महा एग्री डेटा एक्सचेंज: यह राज्य का महत्वाकांक्षी डेटा प्लेटफॉर्म है, जो कृषि क्षेत्र की जानकारी को सुरक्षित रूप से एकत्रित करेगा और शोध एवं नीति निर्माण में मदद करेगा।
भीली भाषा के लिए एलएलएम: आदिवासी बहुल नंदुरबार जिले के लिए भीली भाषा में कृषि सलाह देने वाला पहला लार्ज लैंग्वेज मॉडल लॉन्च किया गया।
महाविस्तार वॉयस टेलीफोनी ऐप: स्मार्टफोन न रखने वाले किसान भी अब साधारण फोन से कृषि संबंधी सवालों के जवाब प्राप्त कर सकेंगे।
कीट एवं रोग पहचान प्रणाली: फसलों की तस्वीर खींचकर किसान तुरंत कीट और बीमारियों की पहचान कर सकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ा
परिषद के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। एक समझौता वर्ल्ड बैंक के साथ ‘महाविस्तार’ के दस्तावेजीकरण और उसके प्रशासनिक ढांचे के विकास के लिए किया गया। दूसरा समझौता नीदरलैंड के प्रसिद्ध वैगेनिंगेन विश्वविद्यालय के साथ हुआ, जिससे महाराष्ट्र के कृषि विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलेगा।
तकनीक से बदलेगी किसानों की तस्वीर
परिषद में आए विशेषज्ञों ने कहा कि एआई सिर्फ एक उपकरण है, असली बदलाव तब आएगा जब इसे किसानों की जरूरतों से जोड़ा जाएगा। सह्याद्री फार्म्स के विलास शिंदे ने कहा कि किसान तकनीक तभी अपनाएंगे जब उन्हें इससे उत्पादन बढ़ने और लागत घटने के ठोस सबूत मिलेंगे। वहीं, नीदरलैंड की कृषि सलाहकार मैरियन वैन शाइक ने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी के नीदरलैंड मॉडल को महाराष्ट्र में अपनाया जा सकता है। इस प्रकार, यह परिषद महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गई है, जहां तकनीक और किसान एक साथ मिलकर देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेंगे।
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