मुंबई. संसदीय लोकतंत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले देश के चुनिंदा जनप्रतिनिधियों के लिए घोषित प्रतिष्ठित “संसद रत्न पुरस्कार 2026” में इस बार महाराष्ट्र का दबदबा देखने को मिला है. इस वर्ष राज्य के पांच सांसदों को इस गौरवशाली सम्मान से नवाजा जा रहा है, जिस पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी विजेता सांसदों को मनःपूर्वक बधाई दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के प्रश्नों पर प्रभावी मांडणी और संसदीय कामकाजात इन सांसदों का उल्लेखनीय योगदान निश्चित रूप से सभी के लिए प्रेरणादायी है.
महायुती के सांसदों ने लहराया परचम
इस वर्ष के पुरस्कारों में भारतीय जनता पार्टी और महायुती के पांच सांसदों ने अपनी विशेष कार्यशैली से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है. पुरस्कार पाने वाले गौरवशाली सांसदों में भाजपा सांसद डॉ. हेमंत सवरा, सांसद मेधाताई कुलकर्णी, सांसद स्मिताताई वाघ के साथ-साथ शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे और सांसद नरेश म्हस्के शामिल हैं. इन सभी जनप्रतिनिधियों ने सदन में जनता की आवाज को मजबूती से बुलंद किया है. इस वर्ष देशभर से 10 लोकसभा, 2 राज्यसभा सांसद और 4 संसदीय समितियों के सदस्यों का चयन किया गया है, जिसमें उपस्थिति, चर्चाओं में सहभागिता और प्रश्नों की गुणवत्ता का व्यापक मूल्यांकन किया गया.
श्रीकांत शिंदे को दूसरी बार मिला सम्मान
पुरस्कार विजेताओं में शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे का लगातार बेहतर संसदीय प्रदर्शन अब राष्ट्रीय स्तर पर दूसरी बार सम्मानित होने जा रहा है. उन्हें प्रतिष्ठित संसद रत्न पुरस्कार के लिए चुना गया है और यह उनका दूसरा अवसर है, जो उनकी प्रभावशाली कार्यशैली, जनहित के मुद्दों पर अध्ययन पूर्ण प्रस्तुति और संसद में सक्रिय भूमिका की स्पष्ट पुष्टि करता है. इससे पहले वर्ष 2024 में भी वे इस पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं. डॉ. शिंदे द्वारा पिछले एक वर्ष में प्रस्तुत किए गए छह महत्वपूर्ण निजी विधेयकों को इस चयन का मुख्य आधार माना गया है.
छह निजी विधेयक बने मुख्य आधार
डॉ. शिंदे द्वारा प्रस्तुत छह महत्वपूर्ण निजी विधेयकों में डीपफेक रेगुलेशन बिल, राष्ट्रीय प्राकृतिक आपदा नियंत्रण एवं पीड़ित कल्याण बोर्ड विधेयक, गौ संरक्षण एवं संवर्धन विधेयक, अनाथ बाल कल्याण एवं विकास विधेयक, निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार संशोधन विधेयक तथा एडवोकेट्स संशोधन विधेयक शामिल हैं. इनके माध्यम से उन्होंने आधुनिक तकनीकी चुनौतियों से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक के मुद्दे प्रभावी ढंग से उठाए.
वैश्विक मंच पर भी किया देश का प्रतिनिधित्व
संसदीय कार्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी डॉ. शिंदे ने देश का मान बढ़ाया है. गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी डॉ. शिंदे ने किया था. उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, साइबेरिया, सिएरा लियोन और कांगो की यात्रा के दौरान पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखा. इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2010 में प्राइम पॉइंट फाउंडेशन द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के सुझाव पर की गई थी.

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