मुंबई: राज्य के मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण और झटका देने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने मुस्लिम समाज को दिए गए 5 प्रतिशत एसबीसी (विशेष पिछड़ा वर्ग–ए) आरक्षण को रद्द करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आधिकारिक शासनादेश जारी कर दिया गया है। साथ ही, इस आरक्षण के आधार पर जारी किए जाने वाले जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है।
12 साल पुराना आरक्षण हुआ समाप्त
यह आरक्षण लगभग 12 वर्ष पहले लागू किया गया था। इसके तहत सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समूह को सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती तथा शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए 5% आरक्षण प्रदान किया गया था। यह प्रावधान सामान्य प्रशासन विभाग के अध्यादेश के तहत लागू किया गया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फैसला
साल 2014 में जारी महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक 14 के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय में रिट याचिका (क्र. 2053/2014) दायर की गई थी। 14 नवंबर 2014 को अदालत ने राज्य के नियंत्रणाधीन लोकसेवाओं में एसबीसी-ए वर्ग के लिए 5% पद आरक्षित रखने के प्रावधान पर अंतरिम स्थगन (स्टे) दे दिया था। चूंकि यह अध्यादेश 23 दिसंबर 2014 तक कानून में परिवर्तित नहीं हो सका, इसलिए वह स्वतः निरस्त (लैप्स) हो गया। इसी आधार पर उससे जुड़े सभी शासन निर्णय और परिपत्र भी अमान्य माने गए।
सरकार का आधिकारिक निर्णय
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 14 नवंबर 2014 से संबंधित शासन निर्णयों की अमलवाजी स्थगित मानी जाएगी। साथ ही, अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा जारी सभी संबंधित आदेश और परिपत्र रद्द कर दिए गए हैं। यह शासन निर्णय महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है और इसे डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी किया गया है। इस फैसले से राज्य के मुस्लिम समुदाय में असंतोष की संभावना जताई जा रही है, जबकि सरकार ने इसे न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप कदम बताया है।

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