मानसून सत्र से पहले रिपोर्ट देने का निर्देश
मुंबई. महाराष्ट्र में स्कूली बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और उसके गंभीर दुष्परिणामों को देखते हुए राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने इस समस्या के समग्र समाधान के लिए विशेषज्ञों की एक टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया है। यह टास्क फोर्स आगामी मानसून सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, ताकि ठोस नीति बनाकर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशीष शेलार ने बुधवार को विधान परिषद में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2 फरवरी 2026 को ही आईटी विभाग के प्रधान सचिव वीरेंद्र सिंह को टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। विधान परिषद सदस्य निरंजन डावखरे और संजय केणेकर ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए इस गंभीर मुद्दे को उठाया। चर्चा में विधायक प्रवीण दरेकर, चित्रा वाघ, भाई जगताप और उमा खापरे ने भी हिस्सा लिया।
गेमिंग ऐप से फैल रहा कट्टरपंथ
चर्चा के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा भाजपा की महिला प्रदेशाध्यक्ष एवं विधायक चित्रा किशोर वाघ ने किया। उन्होंने कहा, ‘रोब्लाक्स’ और ‘माइनक्राफ्ट’ जैसे लोकप्रिय गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से आतंकवादी संगठन और कट्टरपंथी तत्व 11 से 17 वर्ष के बच्चों तक अपने आपराधिक विचार पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। यह बेहद चिंताजनक है। इस मुद्दे पर एक माँ और जन-प्रतिनिधि के नाते मैं चुप नहीं बैठ सकती। हमारे बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना ही हमारी प्राथमिकता है क्योंकि वे ही देश का भविष्य हैं।” उन्होंने राज्य में ‘बाल डिजिटल सुरक्षा’ के लिए एक स्वतंत्र नीति बनाने की पुरजोर मांग की, जिस पर मंत्री आशीष शेलार ने सकारात्मक आश्वासन दिया।
चिंताजनक आंकड़े
राज्य में 18 वर्ष से कम उम्र के लगभग चार करोड़ बच्चे हैं, जिनमें से तीन करोड़ बच्चे 15 साल से कम आयु के हैं। ‘रिस्पॉन्सिबल नेटिज़म’ संस्था के अध्ययन के अनुसार, महाराष्ट्र के विभिन्न केंद्रों पर आने वाले हर 10 में से 3 बच्चे गंभीर गेमिंग लत (एडिक्शन) के शिकार हैं। स्कूलों में किए गए सर्वेक्षण बताते हैं कि 40% बच्चों में डिजिटल लत मध्यम से गंभीर स्तर पर पहुँच चुकी है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। उनमें डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।
टास्क फोर्स का स्वरूप और कार्य
मंत्री आशीष शेलार ने बताया कि 2 फरवरी 2026 को ही आईटी विभाग के प्रधान सचिव वीरेंद्र सिंह को टास्क फोर्स गठित करने के लिखित निर्देश दे दिए गए हैं। टास्क फोर्स में शिक्षा विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक, बाल परामर्शदाता, तकनीकी विशेषज्ञ, डॉक्टर और कानूनी जानकार शामिल होंगे। इसके साथ ही दोनों सदनों के सदस्यों की एक संयुक्त समिति भी इस विषय पर कार्य करेगी। सरकार ने टास्क फोर्स को मानसून सत्र से पहले अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया है। मंत्री शेलार ने स्पष्ट किया कि यद्यपि डिजिटल कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, लेकिन राज्य की टास्क फोर्स की सिफारिशें केंद्र को भेजी जाएंगी ताकि गेमिंग विज्ञापनों और ऐप्स पर सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकें।
सरकार की आगामी योजनाएं
डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार कई कड़े कदम उठाने की तैयारी में है:
आयु सत्यापन: गेमिंग प्लेटफॉर्म के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) आधारित आयु सत्यापन अनिवार्य करना।
डिजिटल हाइजीन: स्कूली पाठ्यक्रम में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के पाठ शामिल करना।
स्क्रीन-फ्री सैटरडे: सरकारी स्कूलों में शनिवार को मोबाइल और स्क्रीन से पूरी तरह दूर रहने की पहल।
साइबर वेलनेस सेंटर: जिला स्तर पर बच्चों और अभिभावकों की काउंसलिंग के लिए केंद्रों की स्थापना।
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