मुंबई: छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (MUMBAI AIR PORT) पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी (gold smuggling) के एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में एयरपोर्ट की एक महिला कर्मचारी भी गिरफ्तार हुई है। डीआरआई ने इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में देशभर में करीब 23 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति जब्त की है।
एयरपोर्ट कर्मचारी भी शामिल
डीआरआई के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में एयरपोर्ट पर कार्यरत एक महिला कर्मचारी, उसे निर्देश देने वाला मुख्य व्यक्ति, तीन बिचौलिए, सोना गलाने वाली इकाई का संचालक तथा गलाने की प्रक्रिया में शामिल तीन अन्य लोग शामिल हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने उस स्थान का भी पता लगाया, जहां तस्करी कर लाए गए विदेशी सोने को गलाया जाता था।
बेहद संगठित था तस्करी का नेटवर्क
डीआरआई ने बताया कि सोना तस्करी करने वाले गिरोह पहले की तुलना में अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सतर्क हो गए हैं। ये गिरोह एयरपोर्ट पर कार्यरत लोगों की मदद लेते हैं और बहु-स्तरीय नेटवर्क के जरिए जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश करते हैं।
बेंगलुरु में भी बड़ी कार्रवाई
एक अलग अभियान में डीआरआई ने बेंगलुरु में एक अंतरराष्ट्रीय यात्री के कपड़ों की कई परतों में छिपाकर लाई गई 1.8 किलोग्राम 24 कैरेट सोने की पेस्ट बरामद की। इसके बाद आरोपी के घर की तलाशी में करीब 1.5 किलोग्राम सोने के आभूषण, 45 किलोग्राम चांदी तथा भारतीय और विदेशी मुद्रा भी जब्त की गई। इस मामले में भी आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
देशभर में कार्रवाई, 23 करोड़ की संपत्ति जब्त
डीआरआई ने बताया कि इस सप्ताह हैदराबाद, राजकोट, कालीकट, विशाखापत्तनम, गुवाहाटी और पश्चिम बंगाल के पेट्रापोल सीमा चौकी सहित कई स्थानों पर अभियान चलाया गया। इन कार्रवाइयों में लगभग 6 किलोग्राम तस्करी का विदेशी सोना जब्त किया गया और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालिया अभियानों को मिलाकर कुल लगभग 15 किलोग्राम सोना, 45 किलोग्राम चांदी और करीब 23 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई है, जबकि कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
‘ऑपरेशन गोल्डन ड्रॉप’ में सामने आया था नया तरीका
डीआरआई ने बताया कि 20 मई को ‘ऑपरेशन गोल्डन ड्रॉप’ के तहत मुंबई एयरपोर्ट पर 3 किलोग्राम विदेशी सोना जब्त किया गया था, जिसकी कीमत लगभग 4.8 करोड़ रुपये थी। जांच में खुलासा हुआ था कि तस्करी के सोने को मोम जैसी पेस्ट में बदलकर विशेष रूप से तैयार अंडाकार कैप्सूल में छिपाया जाता था और तस्कर इन्हें निगलकर मुंबई तक पहुंचाते थे।
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