पिछले हफ्ते गिरफ्तार हुए थे जुहू पुलिस के कर्मचारी
मुंबई.: कुछ ही दिन पहले जुहू पुलिस थाने से जुड़े पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी से खाकी पर लगे दाग अभी धुले भी नहीं थे कि इसी बीच रेलवे पुलिस (जीआरपी) के तीन कर्मियों की बर्खास्तगी से पुलिस की छवि खराब हुई है।
मुंबई सेंट्रल रेल पुलिस थाने में तैनात इन तीन पुलिस कर्मियों पर एक ज्वेलरी व्यापारी से लूट का आरोप लगा था। 10 अगस्त 2025 की रात की घटना बताई जा रही है। वारदात को मुंबई सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर अंजाम दिया गया था। मामले की जांच के बाद दोषी पाए गए एक सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) और दो कॉन्स्टेबल्स को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
घात पात जांच के बहाने लूट
मिली जानकारी के अनुसार, राजस्थान के चूरू निवासी 37 वर्षीय कमलकुमार सोनी अपनी 8 वर्षीय बेटी और रिश्तेदार के साथ दुर्गाेंटो एक्सप्रेस से लौटने वाले थे। इसी दौरान एक वर्दीधारी कॉन्स्टेबल ने उन्हें जांच के बहाने रोका। तलाशी के दौरान सोनी के पास से 14 ग्राम सोने की बिस्किट और ₹31,900 नकद मिले। वैध रसीद दिखाने के बावजूद आरोपी ने उन्हें गालियां दीं और कथित रूप से मारपीट की।
अंधेरे कमरे में ले जाकर धमकाया
इसके बाद दो अन्य पुलिसकर्मियों ने सोनी और उनके परिवार को प्लेटफॉर्म के पास एक अंधेरे कमरे में ले जाकर डराया-धमकाया। खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताने वाले तीसरे आरोपी ने भी मारपीट की और जबरन खाली कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए। इस दौरान उनकी बेटी डर से रोने लगी।
लूट के बाद लौटाए सिर्फ ₹1,900
ट्रेन छूटने से पहले आरोपियों ने सोने की बिस्किट और पूरी नकदी अपने पास रख ली। जब सोनी ने यात्रा के लिए पैसे नहीं होने की बात कही, तब उन्हें केवल ₹1,900 लौटाकर जाने दिया गया।
राजस्थान में दर्ज हुई शिकायत
घर लौटने के बाद सोनी ने 18 अगस्त को राजस्थान के रतनगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसे बाद में मुंबई सेंट्रल जीआरपी को ट्रांसफर किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 119(1) के तहत केस दर्ज हुआ।
8 महीने में जांच पूरी, सख्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी ने तीनों आरोपियों, ललित जगताप (एपीआई), राहुल भोसले और अनिल राठौर (कॉन्स्टेबल) को पहले निलंबित किया और विभागीय जांच पूरी होने के बाद 30 मार्च को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का संदेश
सामाजिक कार्यकर्ता समीर जावेरी ने कहा कि 8 महीनों में जांच पूरी कर सख्त कार्रवाई करना यह दर्शाता है कि विभाग भ्रष्टाचार और जबरन वसूली को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। यह कदम अन्य पुलिसकर्मियों के लिए भी कड़ा संदेश है।

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