मुंबई : महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर सख्ती दिखाने वाली फडणवीस सरकार अब खुद भाषाई गलतियों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है। रिक्षा, टैक्सी और कैब चालकों को मराठी बोलने की अनिवार्यता पर जोर देने वाली सरकार के मंत्रालय परिसर में ही मराठी भाषा की खराब स्थिति सामने आई है। मंत्रालय के प्रवेशद्वार पर लगे सूचना फलक पर शुद्धलेखन और वाक्य रचना की गंभीर गलतियां दिखाई देने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।
प्रवेशद्वार के बोर्ड पर दिखीं कई भाषाई त्रुटियां
मंत्रालय में आने वाले नागरिकों के मार्गदर्शन के लिए लगाए गए सूचना बोर्डों पर मराठी भाषा की कई गलतियां देखी गई हैं। इन गलतियों के कारण सरकार की भाषाई संवेदनशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जहां सरकार मराठी के संरक्षण और प्रचार की बात करती है, वहीं मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर में गलत मराठी का इस्तेमाल होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
गलत वाक्य रचना बना चर्चा का विषय
मंत्रालय में प्रवेश के लिए लगाए गए एक बोर्ड पर लिखा गया है, “मंत्रालय प्रवेशकरिता 02.00 वाजल्यांचे रांग येथून चालू”, जिसे पूरी तरह गलत माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार इसकी सही वाक्य रचना “मंत्रालय प्रवेशाकरिता दुपारी २.०० वाजल्यापासून रांग येथून असेल” होनी चाहिए थी। यह बोर्ड कई दिनों से उसी स्थिति में लगा होने की बात सामने आई है।
कर्मचारियों के लिए लगाए गए फलक पर भी गलती
केवल नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के लिए लगाए गए सूचना फलक पर भी अजीब और गलत वाक्य रचना देखने को मिली। एक बोर्ड पर लिखा गया है, “सर्व कर्मचाऱ्यांनी मंत्रालयात प्रवेश करताना ओळखपत्र दर्शनी भागावर लावणे बंधनकारक आहे।” इस वाक्य को लेकर भी सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है।
प्रशासन की गंभीरता पर उठे सवाल
मंत्रालय में हर दिन सैकड़ों अधिकारी और कर्मचारी इन बोर्डों के सामने से गुजरते हैं, लेकिन अब तक इन गलतियों को सुधारने की कोई कोशिश नहीं की गई। इससे लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन वास्तव में मराठी भाषा के संरक्षण और सम्मान को लेकर गंभीर है या केवल दिखावे तक सीमित है। मंत्रालय में गलत मराठी वाले बोर्ड अब सरकार के लिए नई असहज स्थिति बनते जा रहे हैं।

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