मुंबई: सोशल मीडिया पर ‘पायल गेमिंग’ के नाम से लोकप्रिय यूट्यूबर पायल धारे से जुड़े एक डीपफेक वीडियो के मामले में महाराष्ट्र साइबर सेल ने प्राथमिकी दर्ज की है। पायल धारे एक प्रसिद्ध सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर हैं और गेमप्ले वीडियो तथा लाइव स्ट्रीम्स के लिए जानी जाती हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर 4.5 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं।
अधिकारियों के अनुसार, पायल धारे ने शिकायत दर्ज कराई कि ऑनलाइन प्रसारित एक वीडियो में गलत तरीके से उन्हें दिखाया गया है। इस वीडियो के कारण उन्हें गंभीर मानसिक आघात, प्रतिष्ठा को नुकसान और भावनात्मक संकट का सामना करना पड़ा है। प्रारंभिक फोरेंसिक विश्लेषण में पुष्टि हुई है कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके बनाया गया एक डीपफेक वीडियो है।
इन कानूनों के तहत दर्ज हुआ मामला
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 3(5), 79, 356(2), सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 67 तथा अश्लील प्रतिनिधित्व (महिलाओं का निषेध) अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया है। महाराष्ट्र साइबर ने पीड़िता की प्रतिष्ठा की सुरक्षा के लिए एक प्रमाणपत्र जारी कर इस वीडियो के डीपफेक होने की पुष्टि की है। इस प्रमाणपत्र से निर्मित सामग्री के आगे दुरुपयोग या प्रसारण को रोकने में मदद मिलेगी। वीडियो की उत्पत्ति का पता लगाने, जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने और उन्हें ट्रैक करने के लिए जो लोगों ने इसे वित्तीय लाभ, उत्पीड़न या प्रतिष्ठा हानि के लिए प्रसारित किया, एक विस्तृत जांच शुरू की गई है। जांच में उन्नत साइबर फोरेंसिक, डिजिटल ट्रैल विश्लेषण और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय शामिल है।
पायल धारे की जनता से अपील
इससे पहले बुधवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, पायल धारे ने जनता और मीडिया से इस डीपफेक वीडियो को किसी भी रूप में साझा करने, पुन: प्रस्तुत करने या अटकलें लगाने से परहेज करने की अपील की थी। उन्होंने कहा, “मेरे नाम और छवि के दुरुपयोग को रोकने और कानून के तहत जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”

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