मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने जमीन के सातबारा की तर्ज पर अब पानी का भी विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने “जल सातबारा” योजना को लागू करने की घोषणा करते हुए इसे देश का पहला अभिनव प्रयोग बताया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में इस योजना को विकसित महाराष्ट्र की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
गांव और शहरों के जलस्रोतों का बनेगा डेटा
इस योजना के तहत गांव और शहरों में उपलब्ध जलस्रोत, पानी की मात्रा, उसका उपयोग और भविष्य की जरूरतों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर पानी की बैलेंस शीट तैयार होगी, जिससे हर क्षेत्र में जल उपलब्धता की सही स्थिति सामने आ सकेगी।
पायलट प्रोजेक्ट से होगी योजना की शुरुआत
सरकार पहले चरण में महाराष्ट्र के एक गांव और एक नगर परिषद क्षेत्र में इस योजना को प्रायोगिक रूप से लागू करेगी। इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिए योजना की कार्यप्रणाली और उसके परिणामों का अध्ययन किया जाएगा, जिसके बाद इसे अन्य क्षेत्रों में विस्तार देने पर विचार होगा।
पानी की बर्बादी रोकने में मिलेगी मदद
“जल सातबारा” लागू होने से यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में पानी का कितना उपयोग हो रहा है और कहां अत्यधिक बर्बादी हो रही है। सरकार का मानना है कि इससे पानी की अनियंत्रित खपत पर रोक लगेगी और जल प्रबंधन अधिक प्रभावी बनेगा।
जल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहां जलस्रोतों के पुनर्भरण और संरक्षण की योजनाएं बेहतर तरीके से लागू की जा सकेंगी। सरकार को यह तय करने में आसानी होगी कि किन इलाकों में जलस्रोतों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के साथ हुई अहम बैठक
“जल सातबारा” योजना को वॉटर अकाउंटिंग फ्रेमवर्क और वॉटर बैलेंस शीट की अवधारणा के आधार पर विकसित किया जाएगा। इस संबंध में मंत्रालय में हुई बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और जल विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें आईआईटी बॉम्बे के जल विशेषज्ञ डॉ. अविनाश कदम सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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