मुंबई : महाराष्ट्र सरकार के उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य में अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय ‘मंत्रा’ (MANTRA) केंद्र की स्थापना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. यह नया केंद्र राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में होने वाले शोध कार्यों को सीधे पेटेंट और उद्योगों से जोड़ने में एक मजबूत पुल का काम करेगा, जिससे महाराष्ट्र की अनुसंधान और पेटेंट संस्कृति को एक नई उड़ान मिलेगी.
प्रयोगशाला से बाजार तक का सफर
वर्तमान में राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में हर साल बड़े पैमाने पर शोध कार्य होते हैं, लेकिन सही मार्गदर्शन और तकनीकी जानकारी के अभाव में वे केवल शोध पत्रों या प्रयोगशालाओं तक ही सीमित रह जाते हैं. डॉ. ए. बी. पंडित की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति के सघन अध्ययन के बाद इस कमी को दूर करने के लिए ‘मंत्रा’ की रूपरेखा तैयार की गई है. यह केंद्र शोधकर्ताओं को शुरुआती विचार से लेकर पेटेंट मिलने तक हर कदम पर व्यावहारिक मार्गदर्शन और कानूनी सहायता प्रदान करेगा.
जुलाई से शुरू होगी ‘मंत्रा’ अकादमी
इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण के तहत आगामी 1 जुलाई से मुंबई विश्वविद्यालय के कलीना परिसर में ‘मंत्रा’ अकादमी की शुरुआत होने जा रही है. इसके साथ ही राज्य के प्राध्यापकों के लिए ‘संकल्प’ नामक 30 घंटे का एक विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी चलाया जाएगा. यह पाठ्यक्रम शिक्षकों को बौद्धिक संपदा प्रबंधन, पेटेंट की जटिल प्रक्रिया और अनुसंधान के व्यावसायिकीकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण देगा, ताकि वे पेटेंट फाइलिंग के दौरान होने वाली समस्याओं से बच सकें.
पेटेंट बैंक’ और बजट का प्रावधान
इस परियोजना की एक और बड़ी विशेषता राज्य स्तरीय ‘पेटेंट बैंक’ की स्थापना है. इसके माध्यम से महाराष्ट्र के सभी शैक्षणिक संस्थानों को मिले पेटेंट का एक संरचित डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा. इससे उद्योगों को यह जानने में आसानी होगी कि किस क्षेत्र में कौन सी तकनीक उपलब्ध है और वे उसका व्यावसायिक उपयोग कैसे कर सकते हैं. राज्य सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए लगभग 60 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है और निदेशक व विभिन्न तकनीकी विशेषज्ञों सहित 28 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी है.
विकसित भारत के सपने को मजबूती
विकसित देशों की तर्ज पर शुरू किया गया यह उपक्रम महाराष्ट्र को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया यह कदम न केवल बड़े शहरों बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे कॉलेजों के शोधकर्ताओं के लिए भी वरदान साबित होगा. अनुसंधान को समाज और उद्योग के काम में लाकर यह केंद्र वास्तव में महाराष्ट्र की प्रगति को एक नया मंत्र देगा.

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