मुंबई. घाटकोपर (पूर्व) के पंतनगर में स्थित मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मराठी स्कूल नंबर 2 को बंद कर उसकी जगह निजी संस्था को सौंपने के फैसले के खिलाफ शनिवार को हजारों लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. सकल मराठी समाज-मुंबई द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन को आम जनता का भारी समर्थन मिला.
निजीकरण के खिलाफ गूंजे नारे
शाम 6.00 बजे शुरू हुए इस आंदोलन में मराठी भाषा प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, अभिभावक, छात्र और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने “नगर पालिका स्कूल बचाओ” और “शिक्षा का निजीकरण बंद करो” जैसे नारों के साथ पूरे परिसर को गुंजा दिया.
बीएमसी पर गंभीर आरोप
आंदोलन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मुंबई में बीएमसी के मराठी स्कूलों को जानबूझकर नजरअंदाज कर बंद किया जा रहा है. उन्होंने संदेह जताया कि स्कूलों की कीमती जमीनों को निजी शिक्षण संस्थानों को सौंपने के पीछे बड़ा आर्थिक खेल चल रहा है.
प्रशासन को दी बड़ी चेतावनी
आंदोलनकारियों ने मांग की है कि स्कूल की जमीन निजी संस्था को देने का फैसला तुरंत रद्द हो और वहां आधुनिक सुविधाओं वाला नया मराठी स्कूल शुरू किया जाए. नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो भविष्य में और भी तीव्र आंदोलन किया जाएगा.
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