मुंबई सत्र अदालत का सख्त फैसला
बच्चे को था चाचा पर भरोसा, बेरहमी से किया कत्ल
मुंबई की एक सत्र अदालत ने 2019 में सात वर्षीय भतीजे के अपहरण और हत्या के मामले में 29 वर्षीय चाचा नौशाद अब्बासी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज से साफ है कि मासूम बच्चे को अपने चाचा पर पूरा भरोसा था, लेकिन आरोपी ने उसी भरोसे को तोड़ते हुए उसकी बेरहमी से हत्या की।
अदालत के अनुसार, आरोपी का बच्चे की मां के साथ लगातार झगड़ा होता था। तेज आवाज में गाना बजाने, कपड़े न धोने और खाने के स्वाद जैसी छोटी-छोटी बातों पर विवाद होते रहते थे। बच्चे के लापता होने से एक दिन पहले ही आरोपी ने धमकी भी दी थी, जिससे हत्या का स्पष्ट मकसद सामने आया।
‘लास्ट सीन’ थ्योरी और सीसीटीवी बने अहम सबूत
न्यायाधीश महेश के. जाधव ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने ‘लास्ट सीन’ थ्योरी, फॉरेंसिक रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोप साबित कर दिए हैं। फुटेज में बच्चा अपने चाचा के साथ शांतिपूर्वक चलते हुए दिखाई देता है, जो उसकी जिंदगी के आखिरी पल थे।
गणतंत्र दिवस पर लापता, अगले दिन मिली लाश
यह दर्दनाक घटना 26 जनवरी 2019 को हुई, जब इरफान अब्बासी झंडा खरीदने घर से निकला और वापस नहीं लौटा। पिता रोशन अब्बासी ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। अगले दिन चेंबूर के एक बैंक्वेट हॉल के पास बच्चे का शव मिला। पोस्टमार्टम में गला घोंटने और शरीर पर कई गंभीर चोटों की पुष्टि हुई।
खून से सने कपड़े और फॉरेंसिक कड़ी
एक जनरल स्टोर मालिक और पान दुकान संचालक ने बच्चे को आरोपी के साथ आखिरी बार देखने की गवाही दी। इसके अलावा, आरोपी के कपड़ों पर बच्चे के ही ब्लड ग्रुप का खून पाया गया, जो एक वर्कशॉप में पानी की टंकी के पीछे छिपाए गए थे। अदालत ने कहा कि आरोपी इस खून के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिससे परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी और मजबूत हो गई।
अदालत की टिप्पणी
न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे यह साबित कर दिया है कि आरोपी ने निजी रंजिश के चलते इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। इसी आधार पर नौशाद अब्बासी को उम्रकैद की सजा सुनाई

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