मुंबई: मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव का बिगुल फूँकते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव और आदित्य ठाकरे पर तीखा हमला बोला है। वर्ली डोम में आयोजित महायुति (भाजपा, शिवसेना-शिंदे, रिपाई) की पहली संयुक्त सभा में शिंदे ने ‘ठाकरे’ पिता-पुत्र का नाम लिए बिना उन पर जमकर तंज कसे। शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा, “इनका ‘म’ मलाई और मतलब के लिए है, जबकि हमारा ‘म’ मराठी माणुस और महायुति के लिए है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को केवल चुनाव के समय मराठी माणुस की याद आती है, जबकि उनकी नीतियों के कारण ही मराठी व्यक्ति मुंबई से बाहर अंबरनाथ और बदलापुर जाने को मजबूर हुआ।
नेटफ्लिक्स और पॉलिटिक्स पर तंज
ठाकरे परिवार की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए शिंदे ने कहा, “इनका दिन भर नेटफ्लिक्स चलता है और चुनाव आते ही इन्हें पॉलिटिक्स याद आती है।” उन्होंने आगे कहा कि मुंबई को अब ‘स्पीड ब्रेकर’ और ‘ब्रोकर’ वाली सरकार नहीं, बल्कि ‘ट्रिपल इंजन’ (मोदी, फडणवीस और शिंदे) की प्रगति वाली सरकार चाहिए।
भ्रष्टाचार और ठेकेदारी पर सवाल
शिंदे ने मराठी का मुद्दा उठाते हुए पूछा, ‘‘मराठी माणूस मुंबई छोड़कर अंबरनाथ-बदलापुर क्यों जा रहा है? जिनके हाथों में मुंबई थी, उन्होंने एक भी मराठी कंत्राटदार को बड़ा क्यों नहीं बनाया?’’ आदित्य ठाकरे के अभिनेता मित्र डीनो मोरियो के बहाने निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि मीठी नदी का कीचड़ निकालने का ठेका किसी दीनू मोरे को क्यों नहीं दिया गया? ठेकों में पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में ‘टेंडर’ देते समय सिर्फ ‘सरेंडर’ होता था। ठाकरे गुट के ‘करून दाखवलं’ (करके दिखाया) नारे को उन्होंने ‘करप्शन सम्राट’ करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मिशन ‘महाराष्ट्र फास्ट’ है, मुंबई को अब स्थगित नहीं, प्रगति चाहिए।’’
ऐतिहासिक चुनाव की ओर मुंबई
बता दें कि 15 जनवरी को होने वाला यह बीएमसी चुनाव ऐतिहासिक है। 20 साल बाद उद्धव और राज ठाकरे एक साथ मंच पर आए हैं, वहीं शिवसेना में फूट के बाद यह पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है। शिंदे ने स्पष्ट किया कि असली ‘ब्रांड’ केवल बालासाहेब ठाकरे थे और अब आम आदमी ही असली ब्रांड है।

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