मुंबई महिलाओं के खिलाफ अपराध में देश में दूसरे स्थान पर
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट ने महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में मुंबई देश में दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में मुंबई में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 6,358 मामले दर्ज किए गए। 20 लाख से अधिक आबादी वाले 19 महानगरों में दिल्ली 13,396 मामलों के साथ पहले स्थान पर रही, जबकि मुंबई दूसरे स्थान पर रही। महाराष्ट्र के अन्य बड़े शहरों में पुणे में 2,631 और नागपुर में 1,513 मामले दर्ज हुए। पूरे राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 47,954 मामले सामने आए, जिससे महाराष्ट्र देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर रहा।
बच्चों के खिलाफ अपराध में महाराष्ट्र सबसे आगे
रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ अपराध को लेकर भी गंभीर तस्वीर सामने आई है। अत्याचार, यौन शोषण और अन्य अपराधों से जुड़े कुल 24,171 मामले महाराष्ट्र में दर्ज हुए, जो देश में सबसे अधिक हैं। उत्तर प्रदेश 22,222 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
शहरों की बात करें तो मुंबई में बच्चों के खिलाफ 3,374 मामले दर्ज हुए, जो दिल्ली के बाद दूसरे सबसे अधिक हैं। इससे राज्य में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
भ्रष्टाचार के मामलों में भी महाराष्ट्र नंबर वन
एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में भी महाराष्ट्र देश में शीर्ष पर रहा। वर्ष 2024 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 721 मामले दर्ज किए। इसके अलावा एसीबी ने 683 ट्रैप ऑपरेशन चलाए, जिनमें सरकारी कर्मचारियों को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। यह संख्या देश में सबसे अधिक बताई गई है।
आर्थिक अपराध और साइबर क्राइम में भी बढ़े मामले
मुंबई आर्थिक अपराधों के मामलों में भी देश के प्रमुख शहरों में शामिल रही। शहर में धोखाधड़ी और वित्तीय घोटालों से जुड़े 7,771 मामले दर्ज किए गए। साइबर अपराध के मामलों में महाराष्ट्र राज्यों में चौथे स्थान पर रहा, जबकि शहरों में मुंबई बेंगलुरु के बाद दूसरे स्थान पर रही। लगातार बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध भी चिंता का विषय
रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध के 4,918 मामले महाराष्ट्र में दर्ज हुए। इस मामले में राज्य मध्य प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर रहा। वहीं पुलिस हिरासत में मौत के मामलों में महाराष्ट्र में 10 मामलों की नोंद हुई, जो गुजरात के बाद दूसरे सबसे अधिक हैं।
NCRB ने अपराध बढ़ने के पीछे बताई यह वजह
हालांकि एनसीआरबी ने स्पष्ट किया है कि अपराध के बढ़ते आंकड़ों को केवल पुलिस की विफलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ब्यूरो के अनुसार ई-एफआईआर सुविधा, महिला हेल्प डेस्क और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली जैसी व्यवस्थाओं के कारण अब अधिक लोग शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे दर्ज मामलों की संख्या बढ़ी है।
महाराष्ट्र में हर पांच मिनट में एक मौत
एनसीआरबी की रिपोर्ट में महाराष्ट्र को लेकर एक और बेहद चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में औसतन हर पांच मिनट में एक व्यक्ति की हत्या, आत्महत्या या दुर्घटनाजन्य मौत हो रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राकृतिक आपदाओं, सड़क और रेल दुर्घटनाओं, आग, डूबने, बिजली गिरने, भवन गिरने, महामारी और अचानक हार्ट अटैक जैसी घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या अन्य राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र में अधिक है।
2024 में 75 हजार से अधिक आकस्मिक मौतें
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में प्राकृतिक और अन्य कारणों से कुल 4.67 लाख आकस्मिक मौतें हुईं। इनमें से 75,807 मौतें अकेले महाराष्ट्र में दर्ज की गईं, जो कुल संख्या का लगभग 16 प्रतिशत है। विशेष बात यह है कि वर्ष 2023 की तुलना में आकस्मिक मौतों की संख्या में करीब 6 हजार की वृद्धि हुई है। देश में प्रति एक लाख आबादी पर औसतन 33 आकस्मिक मौतें दर्ज की गईं, जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 59 तक पहुंच गया।
आत्महत्या और हत्या के मामलों ने बढ़ाई चिंता
राज्य में विभिन्न कारणों से 22,174 लोगों ने आत्महत्या की, जबकि 2,211 लोगों की हत्या की गई। हत्या, आत्महत्या और आकस्मिक मौतों को मिलाकर राज्य में एक लाख से अधिक लोगों की जान गई।
डूबने और गिरने से 10 हजार से अधिक मौतें
रिपोर्ट के अनुसार खुले गटर, मेनहोल, खड्डों, तालाबों और नदियों में गिरने तथा डूबने की घटनाओं में 10 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई। ऊंचाई से गिरने और गंभीर चोट लगने के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आए। इसके अलावा विमान और नाव दुर्घटनाओं के सबसे अधिक मामले भी महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। आग लगने की घटनाओं में भी राज्य देश में सबसे ऊपर रहा।
सड़क हादसों से ज्यादा हार्ट अटैक से मौतें
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सड़क और रेल दुर्घटनाओं में 19,475 लोगों की मौत हुई, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने और हार्ट अटैक जैसी घटनाओं में इससे अधिक मौतें दर्ज की गईं।
राज्य में 25 हजार से अधिक लोगों की मौत अचानक स्वास्थ्य खराब होने के कारण हुई। इनमें करीब 15 हजार मौतें अचानक आए हार्ट अटैक से हुईं। NCRB ने इसे बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति बताया है।
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