मुंबई. भारत के लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत और बदलाव की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने देशभर में चार नए श्रम कानून लागू कर दिए हैं। इन नए कानूनों के लागू होने के साथ ही पहले से मौजूद 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया गया है। सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा राजपत्र में जारी की है।
48 घंटे साप्ताहिक काम, ओवरटाइम पर नई व्यवस्था
नए श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों के कामकाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के नियमित काम के घंटे फिलहाल आठ घंटे प्रतिदिन ही रहेंगे। हालांकि, सप्ताह में कुल 48 घंटे काम का प्रावधान रहेगा।
इसके अलावा अब आठ घंटे से अधिक काम करने पर ओवरटाइम लागू होगा। नए नियमों के अनुसार यदि कोई कर्मचारी आठ घंटे के बाद 15 मिनट से ज्यादा काम करता है, तो उसे ओवरटाइम माना जाएगा। पहले के कानून में 30 मिनट से अधिक अतिरिक्त काम को ही ओवरटाइम की श्रेणी में रखा जाता था। इस बदलाव का कर्मचारी संगठनों और नौकरीपेशा वर्ग ने स्वागत किया है।
ग्रेच्युटी, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव
सरकार ने वेतन, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल की सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों को एकसाथ लागू किया है। नए कानूनों के तहत ग्रेच्युटी, वेतन संरचना और पेंशन से संबंधित नियमों में भी बदलाव होंगे। इसके कारण कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर, कटौती और हाथ में मिलने वाली राशि में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।
सरकार ने कंपनियों को इन नियमों को लागू करने के लिए आवश्यक समय भी दिया है ताकि सभी संस्थान नए प्रावधानों के अनुसार अपनी व्यवस्था तैयार कर सकें।
महिलाओं को मिलेगा समान वेतन और 26 हफ्तों की मातृत्व अवकाश
नए श्रम कानूनों में महिला कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। अब समान काम करने पर पुरुष और महिला कर्मचारियों को बराबर वेतन देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा महिलाओं को प्रसूति के बाद 26 सप्ताह की मातृत्व अवकाश मिलेगी। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को घर से काम करने की सुविधा भी दी जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी बढ़ाना और उन्हें बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है।
40 वर्ष से अधिक कर्मचारियों के लिए मुफ्त मेडिकल जांच अनिवार्य
नए कानूनों के तहत 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए हर साल एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है। सरकार का मानना है कि इससे बीमारियों की समय रहते पहचान हो सकेगी और कर्मचारियों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा।
नौकरी जाने पर मिलेगा प्रशिक्षण और नई स्किल सीखने का मौका
सरकार ने कर्मचारियों को नई तकनीक और आधुनिक कौशल सिखाने के लिए राष्ट्रीय पुनर्कौशल निधि की स्थापना की है। यदि किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो इस फंड के माध्यम से उसे नई ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वह दोबारा रोजगार प्राप्त कर सके।
पांच साल बाद पूरी तरह लागू हुए नए श्रम कानून
ये नए श्रम कानून पहली बार 21 नवंबर 2025 को लागू किए गए थे, लेकिन आवश्यक नियमों और प्रक्रियाओं की कमी के कारण इनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो सका था। अब सरकार ने सभी नियम तय कर दिए हैं, जिसके बाद इन्हें देशभर में पूरी तरह लागू कर दिया गया है।
नए श्रम कानून लागू करना क्यों था जरूरी?
सरकार के अनुसार पहले मौजूद 29 श्रम कानून काफी जटिल और अलग-अलग थे, जिससे कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नए कानूनों के जरिए नियमों को सरल और स्पष्ट बनाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे कारोबार करना आसान होगा, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और देश में नए उद्योगों तथा कंपनियों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version