मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस के दिवंगत नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की 28 जनवरी को हुए विमान हादसे में मौत के बाद अब मामला नया मोड़ लेता दिख रहा है। उनके भतीजे और विधायक रोहित पवार ने कई गंभीर सवाल उठाते हुए हादसे के पीछे साजिश की आशंका जताई है। फोन कॉल, एक महत्वपूर्ण फाइल और यात्रा के बदले फैसले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
कार से जाने का था प्लान, फोन के बाद बदला फैसला?
रोहित पवार के मुताबिक, 27 जनवरी को अजित पवार का बारामती कार से जाने का कार्यक्रम तय था। उनकी बैग भी गाड़ी में रख दी गई थी। लेकिन शाम को आए एक फोन कॉल और मंत्रालय से एक फाइल मंगवाने में हुई देरी के बाद कार्यक्रम बदल गया।
दावा किया जा रहा है कि रात 7:13 बजे विमान की बुकिंग की गई। सवाल उठ रहा है कि क्या उस फोन कॉल के कारण ही यात्रा का निर्णय बदला गया और क्या उसी के चलते यह दुखद हादसा हुआ?
राष्ट्रवादी के प्रवक्ता प्रमोद हिंदूराव ने शोकसभा में कहा था कि 27 जनवरी को प्रफुल्ल पटेल या किसी अन्य नेता का फोन आया था, जिसके कारण फाइल लाने में देरी हुई और सड़क मार्ग से जाने का फैसला रद्द हुआ। हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान के गलत अर्थ निकाले जाने की बात कही।
किस फाइल पर की गई थी आखिरी साइन?
सूत्रों के अनुसार, अजित पवार ने भंडारा-गोंदिया की एक राइस मिल से जुड़ी फाइल पर अंतिम हस्ताक्षर किए थे। यह फाइल मंत्रालय से मंगाने में शाम 7:30 से 8 बजे तक का समय लगा।
रोहित पवार ने यह भी आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ नेता ने फाइल क्लियर कराने पर जोर दिया था। सवाल उठ रहा है कि क्या इस फाइल पर हस्ताक्षर न होते तो विकास कार्य रुक जाता?
सैकड़ों करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट पर विवाद
रोहित पवार ने दावा किया कि एक पॉलिटिकल कंसल्टेंट नरेश अरोरा का सैकड़ों करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने को लेकर विवाद हुआ था। उनके मुताबिक, 27 जनवरी की बैठक में कुछ नेताओं ने इस कॉन्ट्रैक्ट को जारी रखने और भुगतान करने का समर्थन किया, जबकि अजित पवार इसके खिलाफ थे। रोहित पवार ने यह भी कहा कि यदि अजित पवार कार से गए होते तो यह हादसा नहीं होता।
पायलट बदलने और जांच पर सवाल
रोहित पवार ने यह भी सवाल उठाया कि विमान के दोनों पायलट आखिरी समय में क्यों बदले गए? प्रमुख पायलट पिछले एक-दो महीनों में किन लोगों से मिले, किन होटलों में ठहरे — इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक 13-14 दिनों में ठोस जांच नहीं हुई और केवल सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा करने की बात कही गई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
ILS सिस्टम और ब्लैक बॉक्स पर सवाल
बारामती एयरस्ट्रिप पर ILS (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) न होने को हादसे का कारण बताया जा रहा है। रोहित पवार का कहना है कि इसी कंपनी के विमान का दो साल पहले भी हादसा हुआ था, लेकिन उसकी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई। उन्होंने यह भी कहा कि “ब्लैक बॉक्स में कुछ नहीं मिला” जैसे कारण महाराष्ट्र की जनता स्वीकार नहीं करेगी। उनका दावा है कि ब्लैक बॉक्स बंद नहीं किया जा सकता, इसलिए पारदर्शी आपराधिक जांच होनी चाहिए।
विपक्ष के नेताओं की प्रतिक्रियाएं
शिवसेना (ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताया और पूछा कि कौन-सी फाइल इतनी जरूरी थी कि यात्रा का फैसला बदला गया?
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं राष्ट्रवादी प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि अगर किसी को संदेह है तो सबूत सामने लाए जाएं और केंद्र सरकार जांच कर देश के सामने सच्चाई रखे।
अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग
रोहित पवार ने केंद्रीय गृह मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्री से समय मांगा, लेकिन संसद सत्र के कारण मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने ई-मेल के जरिए पत्र लिखने की बात कही है।
उनकी मांग है कि डीजीसीए की जांच के साथ-साथ एक महीने के भीतर अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से भी जांच कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि यह हादसा था या घातपात।
सियासी तूफान जारी
अजित पवार के निधन को शुरू में दुर्घटना बताया गया था, लेकिन अब परिवार के सदस्य और कई नेता ही सवाल खड़े कर रहे हैं। फोन कॉल, फाइल पर हस्ताक्षर और अचानक बदला यात्रा कार्यक्रम — इन तीन बिंदुओं ने पूरे मामले को राजनीतिक और संवेदनशील बना दिया है।
जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा और विवाद का केंद्र बना रहेगा।

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