मुंबई: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, मंगलवार को लगने जा रहा है। खास बात यह है कि यह ग्रहण भौमवती अमावस्या (दर्श/फाल्गुन अमावस्या) के दिन पड़ रहा है, जिसके चलते इसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व दिया जा रहा है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और राहु की युति को ग्रहण योग कहा जाता है, जिसे पारंपरिक रूप से कुछ अशुभ प्रभावों से जोड़ा जाता है। हालांकि इसका प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और अन्य ग्रह स्थितियों पर निर्भर करता है।
कुंभ राशि में बनेगा पंचग्रही योग
ज्योतिषाचार्य दीप्ति शर्मा के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में घटित होगा। इस दौरान सूर्य के साथ राहु, चंद्रमा, बुध और शुक्र भी कुंभ राशि में स्थित रहेंगे, जिससे पंचग्रही योग का निर्माण होगा।
क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
भारतीय स्काईवॉचर्स के लिए यह ग्रहण दृश्यमान नहीं होगा। यह मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में ही देखा जा सकेगा।
क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले से शुरू होता है, लेकिन शास्त्रों का स्पष्ट नियम है—
“जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक मान्य नहीं होता।”
चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा।
मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे
पूजा-पाठ और शुभ कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे
हालांकि सूतक मान्य नहीं है, फिर भी राहुकाल में शुभ कार्यों से बचने की परंपरा है।
राहुकाल और शुभ मुहूर्त की जानकारी
राहुकाल: दोपहर 3:24 से 4:48 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:58 बजे
अमृत काल: सुबह 10:39 से दोपहर 12:17 बजे
राहु-केतु से जुड़ी पौराणिक कथा
हिंदू मान्यताओं में सूर्य ग्रहण को राहु-केतु से जोड़ा जाता है। समुद्र मंथन के दौरान असुर स्वरभानु अमृत पी लेता है, लेकिन विष्णु के सुदर्शन चक्र से उसका सिर और धड़ अलग हो जाता है। सिर राहु और धड़ केतु कहलाता है। मान्यता है कि राहु समय-समय पर सूर्य को निगलने का प्रयास करता है, जिससे ग्रहण लगता है।
भौमवती अमावस्या और ग्रहण के संयोग पर बताए गए विशेष उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ उपाय करने से सकारात्मक फल प्राप्त हो सकते हैं—
कर्ज मुक्ति के लिए: हनुमान जी के मंदिर में त्रिकोणीय लाल झंडा अर्पित करें, इससे शत्रुओं पर विजय और यश की प्राप्ति मानी जाती है।
आर्थिक लाभ हेतु: शिवलिंग पर काले तिल और गुड़ अर्पित करें, इससे पितृ दोष और आकस्मिक बाधाओं से राहत मिलती है।
मनोकामना पूर्ति के लिए: केले के पत्ते पर हल्दी से अपनी इच्छा लिखकर गणेश मंदिर में अर्पित करें, इससे रुके कार्य पूरे होने के योग बनते हैं।
क्या कहता है विज्ञान?
सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। वलयाकार ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता, जिससे सूर्य का बाहरी हिस्सा अग्नि के चमकते छल्ले जैसा दिखाई देता है। 17 फरवरी का सूर्य ग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद खास है, जबकि भारत में यह एक सामान्य दिन रहेगा। आस्था और विज्ञान—दोनों के नियमों के बीच इस दिन कोई टकराव नहीं होगा। खगोल विज्ञान के अनुसार यह एक दुर्लभ और आकर्षक खगोलीय घटना होगी।
‘रिंग ऑफ फायर’ का अद्भुत दृश्य
खगोल विज्ञान की दृष्टि से यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण होगा। इस स्थिति में चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को पूरी तरह ढक लेता है, लेकिन बाहरी किनारा दिखाई देता रहता है, जिससे सूर्य एक चमकती हुई अंगूठी जैसा नजर आता है। इसी कारण इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
सूर्य ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)
घटना समय
ग्रहण प्रारंभ दोपहर 3:26 बजे
मध्य (पीक) शाम 5:42 बजे
ग्रहण समाप्ति रात 7:57 बजे
कुल अवधि 4 घंटे 32 मिनट
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्थाओं, ज्योतिषीय मान्यताओं और लोक विश्वासों पर आधारित है। इसका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पाठक अपने विवेक से निर्णय लें।)

