सत्ताधारी विधायकों ने भी सुर में मिलाया सुर
मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र में मुंबई और एमएमआर (मुंबई महानगर क्षेत्र) में ‘आयुष्मान भारत’ योजना की विफलता को लेकर जोरदार बहस हुई। शिवसेना (यूबीटी) के विधायक वरुण सरदेसाई ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल विज्ञापनों पर खर्च कर रही है, जबकि जमीन पर गरीबों को बड़े अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा है।
“सिर्फ उत्तर नहीं, समयसीमा चाहिए”
सदन में चर्चा के दौरान वरुण सरदेसाई ने भाजपा विधायक अतुल भातखलकर के सवालों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह इस विषय पर चौथा अधिवेशन है, लेकिन हर बार मंत्रियों की ओर से एक जैसा ही ‘सांचे में ढला हुआ’ उत्तर मिलता है।
सरदेसाई ने मांग की कि सरकार केवल आश्वासन न दे, बल्कि एक स्पष्ट ‘टाइमलाइन’ (समयसीमा) घोषित करे कि मुंबई और एमएमआर के बड़े मल्टीस्पेशालिटी और नामांकित अस्पतालों को इस योजना के तहत कब तक अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक नामी अस्पताल इस योजना में नहीं आते, तब तक आम जनता को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।
सत्ताधारी विधायकों ने भी अपनी ही सरकार को घेरा
हैरानी की बात यह रही कि वरुण सरदेसाई के सुर में भाजपा विधायकों ने भी सुर मिलाया। विधायकों ने सामूहिक रूप से निम्नलिखित गंभीर मुद्दे उठाए:
अस्पतालों का इनकार: भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने आरोप लगाया कि मल्टीस्पेशालिटी अस्पताल आयुष्मान कार्ड धारकों को भर्ती करना तो दूर, उन्हें अस्पताल में खड़ा तक नहीं होने देते।
मनीषा चौधरी के ‘रोखठोक’ सवाल: विधायक मनीषा चौधरी ने मांग की कि 50 बेड से अधिक क्षमता वाले सभी सुपर स्पेशालिटी और ट्रस्ट अस्पतालों के लिए आयुष्मान कार्ड अनिवार्य किया जाए। उन्होंने ‘नी रिप्लेसमेंट’ (घुटना प्रत्यारोपण) को भी इस योजना में पूरी तरह मुफ्त शामिल करने का सुझाव दिया।
संजय केलकर का दर्द: ठाणे के विधायक संजय केलकर ने यहां तक कह दिया कि अस्पतालों के असहयोग के कारण उन्होंने अब अपने क्षेत्र में आयुष्मान कार्ड बांटना ही बंद कर दिया है, क्योंकि कार्ड होने के बावजूद मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा।
विधानसभा अध्यक्ष का हस्तक्षेप और सरकार का आश्वासन
विधायकों के तीखे सवालों और वरुण सरदेसाई द्वारा मांगी गई स्पष्ट समयसीमा के बाद माहौल गर्मा गया। स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी सरकार से सवाल किया कि आखिर इन अस्पतालों को योजना में शामिल करने में क्या तकनीकी अड़चन आ रही है?

सरकार की ओर से मंत्री बोर्डीकर का जवाब
अंततः, राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर ने सदन को आश्वासन दिया कि एमएमआर क्षेत्र के प्रतिष्ठित अस्पतालों को योजना में शामिल करने और नए ‘रेट कार्ड’ (दर पत्रक) पर चर्चा करने के लिए इसी महीने के भीतर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी।

मुंबई के गरीब मरीजों को बड़े अस्पतालों की दहलीज से वापस लौटा दिया जाता है। सरकार प्रचार पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, लेकिन एमएमआर रीजन में आयुष्मान कार्ड महज एक प्लास्टिक का टुकड़ा बनकर रह गया है। हमें तारीख चाहिए कि कब तक इन अस्पतालों पर सख्ती होगी।”

  • वरुण सरदेसाई, विधायक (शिवसेना-यूबीटी)
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