मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मालाड स्थित प्रसार भारती की भूमि पर विश्वस्तरीय एकीकृत फिल्म एवं टेलीविजन मीडिया हब विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके साथ ही राज्य को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए पहली बार क्वांटम और डीप टेक नीति को भी मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ये दोनों पहलें महाराष्ट्र को मीडिया, मनोरंजन और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का काम करेंगी।
मालाड में बनेगी विशेष उद्देश्य कंपनी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में मालाड स्थित आकाशवाणी (प्रसार भारती) की भूमि पर ‘इंटीग्रेटेड फिल्म एंड टेलीविजन मीडिया हब’ विकसित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार और प्रसार भारती द्वारा संयुक्त रूप से एक विशेष उद्देश्य कंपनी (एसपीवी) गठित करने को मंजूरी दी गई। इस संबंध में पहले किए गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की समीक्षा भी बैठक में की गई।
बैठक में सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार, प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
150 एकड़ क्षेत्र में होगा संयुक्त विकास
मालाड स्थित प्रसार भारती की कुल 278 एकड़ भूमि में से लगभग 150 एकड़ क्षेत्र का संयुक्त विकास फिल्म सिटी के साथ प्रस्तावित किया गया है। आकाशवाणी के अधिकांश प्रसारण एफएम प्रणाली पर स्थानांतरित होने के कारण उपलब्ध भूमि का उपयोग मीडिया और मनोरंजन उद्योग के विस्तार के लिए किया जाएगा।
इस परियोजना के लिए प्रसार भारती, एमआईडीसी और महाराष्ट्र फिल्म, रंगभूमि एवं सांस्कृतिक विकास महामंडल के बीच पहले ही समझौता किया जा चुका है।
अत्याधुनिक स्टूडियो और प्रशिक्षण केंद्र होंगे स्थापित
प्रस्तावित मीडिया हब में अत्याधुनिक फिल्म स्टूडियो, साउंड स्टेज, हॉस्पिटैलिटी सुविधाएं, आईटी एवं आईटीईएस से जुड़ी इकाइयां, पर्यटन विकास परियोजनाएं तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म और संगीत प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण केंद्रों के लिए विदेशों की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं के साथ सहयोग किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना मुंबई को वैश्विक मीडिया और मनोरंजन उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नियमों में बदलाव और मंजूरियों पर सरकार देगी सहयोग
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि वर्तमान में इस क्षेत्र पर एनडीजेड और सीआरजेड नियम लागू हैं, जिसके कारण सीमित विकास ही संभव है। परियोजना के व्यापक विकास के लिए आवश्यक वैधानिक मंजूरियां, नियमों में संशोधन और विकास नियंत्रण नियमावली में बदलाव की आवश्यकता होगी। राज्य सरकार इस दिशा में हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।
उन्होंने परियोजना के लिए पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और तकनीकी कार्यों को गति देने हेतु संयुक्त कार्यसमिति गठित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही जून माह के अंत तक विकास आराखड़े को अंतिम रूप देने को कहा गया।
महाराष्ट्र बनेगा क्वांटम और डीप टेक क्षेत्र का अग्रणी राज्य
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की पहली ‘महाराष्ट्र क्वांटम नीति’ और ‘महाराष्ट्र डीप टेक नीति’ को भी मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के लागू होने के बाद महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बनेगा, जो संपूर्ण डीप टेक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए व्यापक नीति लागू करेगा।
इस संबंध में वर्षा निवास पर आयोजित बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। दोनों नीतियों को आगामी मंत्रिमंडल बैठक में अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
अनुसंधान और नवाचार को मिलेगा प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्वांटम और डीप टेक नीतियां राज्य में अनुसंधान, नवाचार, निवेश और उच्च कौशल आधारित रोजगार सृजन को बढ़ावा देंगी। इन नीतियों के माध्यम से महाराष्ट्र को वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में उच्च तकनीक आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ेगा, नई तकनीकों पर शोध को गति मिलेगी और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

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