मुंबई : शौक के नाम पर घर में अवैध रूप से अजगर पालने का चौंकाने वाला मामला मुंबई के अंधेरी इलाके से सामने आया है। गुप्त सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने अंधेरी पुलिस की मदद से छापा मारकर एक विशाल अजगर को सुरक्षित बरामद किया। इस कार्रवाई ने सोसायटी के लोगों को हैरान कर दिया, क्योंकि किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके बीच एक खतरनाक वन्यजीव रखा गया है।
आठवीं मंजिल के फ्लैट में रखा गया था अजगर
जानकारी के अनुसार, अंधेरी के गुंदावली स्थित कैलिस्टा सोसायटी (Callista Society) की आठवीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में अवैध रूप से अजगर रखा गया था। वन विभाग को अपने मुखबिर से इसकी सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वन विभाग ने अंधेरी पुलिस (Andheri Police) के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए फ्लैट पर छापा मारा और अजगर को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया।
रहवासियों को नहीं थी भनक
सोसायटी के लोगों को इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि इमारत के एक फ्लैट में इतना बड़ा अजगर रखा गया है। जैसे ही कार्रवाई की जानकारी फैली, पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। रहवासी इस बात को लेकर हैरान थे कि इतने बड़े सांप की मौजूदगी का उन्हें कभी आभास तक नहीं हुआ।
संबंधित व्यक्ति पर होगी कानूनी कार्रवाई
वन विभाग ने अजगर को सुरक्षित अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग अब संबंधित फ्लैट के निवासी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है।
अजगर पालना कानूनन अपराध
वन विभाग के अनुसार, अजगर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) की अनुसूची-1 (Schedule-I) में शामिल अत्यधिक संरक्षित वन्यजीव है। वाघ, तेंदुआ और मोर की तरह अजगर को भी सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। ऐसे वन्यजीव को घर में पालना, खरीदना, बेचना या रखना पूरी तरह अवैध है। केवल मान्यता प्राप्त चिड़ियाघर, रेस्क्यू सेंटर या वन विभाग की विशेष अनुमति प्राप्त संस्थानों को ही इसकी अनुमति दी जाती है।
तीन से सात साल की सजा का प्रावधान
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अजगर को अवैध रूप से रखने के मामले में तीन से सात वर्ष तक की कैद तथा 25 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव को घर में पालने या ऐसी गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल विभाग को सूचित करें।

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