मुंबई. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में तब भूचाल आ गया, जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कैबिनेट मंत्री नरहरी झिरवल के मंत्रालय स्थित कार्यालय पर छापा मारकर एक कर्मचारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद एसीबी ने मंत्री के कार्यालय को सील कर दिया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी क्लर्क राजेंद्र ढेरंगे पर एक शिकायतकर्ता का मेडिकल लाइसेंस निलंबन रद्द करने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग करने का आरोप था। बाद में 35 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। गुरुवार शाम करीब 6 बजे जैसे ही ढेरंगे ने अपने कार्यालय में यह रकम ली, एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया और मौके पर कार्यालय को सील कर दिया। यह कार्यालय अन्न व औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाळ के विभाग का हिस्सा है।
मंत्री झिरवल का बयान: ‘दोषी पाए जाने पर दूंगा इस्तीफा’
इस पूरे मामले को लेकर मंत्री नरहरी झिरवल ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार कर्मचारी सरकारी कर्मचारी है और उसके व्यक्तिगत कृत्य से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर इस रिश्वतखोरी के मामले में मेरा या मेरे कार्यालय के किसी अन्य व्यक्ति का नाम आता है, तो मैं तुरंत मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा।” यह बयान उन्होंने तब दिया जब खबर आई कि आरोपी ढेरंगे ने पूछताछ में मंत्री के निजी सचिव (PS) रामदास गाडे के कहने पर रिश्वत मांगने की बात कबूली है।
कांग्रेस का हमला: हर्षवर्धन सपकाल का ट्वीट
इस घटना के बाद कांग्रेस ने सरकार पर तीखा निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने ट्वीट कर कहा, “राज्य के अन्न व औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवल के कार्यालय के कर्मचारी को मंत्रालय में रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने मंत्री कार्यालय सील कर दिया। इस घटना ने राज्य सरकार की इज्जत की धज्जियां उड़ा दी हैं। चौकाने वाली बात यह है कि चौकशी के दौरान इस कर्मचारी ने बताया कि उसने वरिष्ठों के कहने पर रिश्वत ली थी। यह और भी गंभीर है। इसलिए मंत्री झिरवाळ और उनके कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की गहन जांच होनी चाहिए। मंत्री नरहरी झिरवल ने कहा है कि ‘संबंध पाए जाने पर इस्तीफा दूंगा’, लेकिन नैतिक जिम्मेदारी के तहत, जब उनके कार्यालय में खुलेआम रिश्वतखोरी हुई है, तो उन्हें निष्पक्ष जांच के लिए तुरंत मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।”
अन्य नेताओं के हमले और सियासी घमासान
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने एक अलग ही कोण से सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया, “नरहरी झिरवल आदिवासी हैं, इसलिए उनके कार्यालय में यह जाल बिछाया गया। सरकार के हर विभाग में भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा है।” कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर ने भी इस पूरे मामले को भाजपा की साजिश बताते हुए कहा कि “यह टक्केवारी (प्रतिशत) का सरकार है और नरहरी झिरवाळ को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।”
शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय शिरसाट ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मंत्रालय भी अब रिश्वत से सुरक्षित नहीं रहा। ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों को मंत्रालय से बाहर फेंक देना चाहिए।”
पालघर में भी कार्रवाई
ACB की कार्रवाई सिर्फ मंत्रालय तक सीमित नहीं रही। पालघर जिले के जव्हार में भी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रेत से भरा ट्रैक्टर छोड़ने के एवज में रिश्वत लेने वाले दो तलाठी, गजानन जोहरे और सीताराम इंधन को गिरफ्तार किया है।
गौरतलब है कि मंत्री नरहरी झिरवल उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायक हैं, जो महायुति सरकार का हिस्सा है। इस घटना से सत्तारूढ़ गठबंधन में भी तनाव की स्थिति निर्मित हो गई है।
मंत्रालय स्थित मंत्री झिरवल के कार्यालय में एसीबी का छापा : रिश्वत लेते क्लर्क धराया
Article Top Ad
Article Inline Ad
Article Bottom Ad