मुंबई. ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में दो बच्चियों के साथ सड़क पार कर रही महिला को मदद का झांसा देकर 3 महीने की मासूम को अगवा करने वाली बुर्काधारी आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर अपहृत बच्ची को भी सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस को जांच में पता चला है कि आरोपी महिला ने अपनी संतानहीन बहन की गोद भरने के लिए उक्त वारदात को अंजाम दिया था।
मिली जानकारी के अनुसार, 22 जनवरी को मुंब्रा निवासी 23 वर्षीय फरजाना मंसूरी अपनी दो बेटियों (3 वर्षीया अनबिया और 3 महीने की आफिया) के साथ सड़क पार कर रही थीं। जब उनकी छोटी बेटी रोने लगी, तो एक बुर्काधारी महिला ने मदद का हाथ बढ़ाया और कहा कि वह भी सड़क पार कर रही है। वह छोटी बच्ची को पकड़ सकती है। फरजाना ने अपनी बेटी उस महिला को सौंप दिया। लेकिन जब वह सड़क के दूसरी ओर पहुंचीं, तो वह महिला कहीं नजर नहीं आई। काफी खोजने के बाद भी जब महिला का कोई पता नहीं चला, तो फरजाना को शक हुआ और उन्होंने मुंब्रा पुलिस स्टेशन में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई।
ऑटो के पीछे लिखा था ‘मां’
पुलिस ने जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज में पाया कि एक बुर्काधारी महिला सड़क पार करने के तुरंत बाद एक ऑटो में बैठ गई। ठाणे के पुलिस कमिश्नर आशुतोष डुंबरे ने बताया कि हालांकि सीसीटीवी में ऑटो का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं दिख रहा था, लेकिन टीम ने ऑटोरिक्शा के पीछे मराठी भाषा में ‘आई’ (मां) लिखा देखा और उसी की मदद से उक्त ऑटोरिक्शा चालक को ढूंढ निकाला। ऑटो चालक ने पुलिस को बताया कि उसने महिला को मुंब्रा रेलवे स्टेशन पर उतारा था।
छह टीमों ने की लगातार निगरानी
छह टीमों ने एक महिला को बदलापुर ट्रेन में बैठते देखा और सीसीटीवी फुटेज को ट्रैक करते हुए उसे बदलापुर तक खोजा। हालांकि, वह गलत महिला निकली।
मोजे और सीसीटीवी फुटेजों की मदद से सुलझी गुत्थी!
डुंबरे ने बताया, “हमारी टीमों ने फिर से फुटेज स्कैन करना शुरू किया और एक और बुर्का पहने महिला को पाया। इस बार, जबकि बच्ची उसके बुर्के के नीचे ढकी हुई थी, बच्ची के मोजे के कुछ इंच दिखाई दे रहे थे, जिसके आधार पर उसकी मां ने अपनी बेटी की पहचान की।”
बच्ची को दूसरे दंपत्ति को सौंपा
पुलिस टीम ने देखा कि महिला मुंब्रा रेलवे स्टेशन पर एक दूसरे दंपत्ति से बात कर रही थी, जिन्हें उसने बच्ची सौंप दी और स्टेशन से चली गई। दंपत्ति को सीएसएमटी जाने वाली ट्रेन में देखा गया। पुलिस ने उन्हें ठाणे रेलवे स्टेशन तक ट्रैक किया, जहां उन्होंने अपना रूप बदल लिया था।
आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने फिर उस महिला पर ध्यान केंद्रित किया जिसने बच्ची को दंपत्ति को सौंपा था। करीब 1,600 सीसीटीवी कैमरों को स्कैन करने और स्थानीय मुखबिरों की मदद से पुलिस ने महिला की पहचान नसरीना शेख के रूप में की। जब पुलिस ने नसरीना को हिरासत में लेकर पुलिसिया अंदाज में पूछताछ शुरू की, तो उसने बताया कि उसने बच्ची का अपहरण किया और अपनी बहन खैरुन्निसा गुलाब और बहनोई मोहम्मद गुलाब को सौंप दिया, जो उसे अकोला जिले के खेत्री गांव ले गए। पुलिस ने तुरंत अकोला में टीम भेजी और बच्ची को सुरक्षित हिरासत में लिया तथा दंपत्ति को गिरफ्तार किया।
अपहरण का कारण
डुंबरे ने बताया, “अकोला के इस दंपत्ति को पिछले आठ-नौ वर्षों से संतान नहीं थी। खैरुन्निसा ने बताया कि उसने यूट्यूब पर मुंब्रा में छोड़े गए नाबालिगों के बारे में कुछ वीडियो देखे थे और अपनी बहन को इसके बारे में बताया था। उन्होंने पहले भी नाबालिग का अपहरण करने का प्रयास किया था, लेकिन सफल नहीं हुए थे।”
गुरुवार को तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और बच्ची को सुरक्षित उसके माता-पिता को सौंप दिया गया।
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