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अदाणी को मुलुंड की जमीन दिए जाने का विरोध : राकेश शेट्टी की अगुवाई में ‘मविआ’ का एक दिवसीय अनशन

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मुंबई. मुलुंड की बेशकीमती जमीन धारावी वासियों के पुनर्वास के लिए अदाणी समूह को दिए जाने के महाराष्ट्र सरकार के निर्णय के विरोध में कांग्रेस प्रवक्ता राकेश शंकर शेट्टी ने 1 अगस्त 2025 को सुबह 9:00 बजे से एक दिवसीय भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है. बतौर शेट्टी वह विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (मविआ) के घटक दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राकां शरदचंद्र पवार, समाजवादी पार्टी, मुलुंड दुकानदार संघ और स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर अनशन करनेवाले हैं.
शेट्टी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने धारावी के लगभग 3 लाख अपात्र झोपड़ा धारकों का मुलुंड में पुनर्वास करने की योजना बनाई है. इसे क्षेत्र के पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर खतरा बताते हुए शेट्टी ने कहा कि  धारावी के अपात्र निवासियों को मुलुंड में स्थानांतरित करने की योजना से यहां की सड़कें, फुटपाथ, बस सेवाएं, रेलवे स्टेशन, अस्पताल और स्कूलों पर असहनीय दबाव पड़ेगा, जिससे मुलुंड एक अव्यवस्थित झुग्गी बस्ती में तब्दील हो सकता है. शेट्टी ने निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, “मुलुंड को दूसरा असंगठित धारावी नहीं बनने दिया जाएगा. मैं अदाणी के ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट के खिलाफ डटकर संघर्ष करूंगा जो मुलुंड की शांति और पर्यावरण को बिगाड़े.
सरकार ने तोड़ा वादा
उन्होंने भाजपा सरकार पर वादाखिलाफी आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने कहा था कि धारावी के निवासियों को मुलुंड नहीं लाया जाएगा, लेकिन अब सरकार अपना वादा पूरी तरह से तोड़ रही है. शेट्टी ने कहा कि यह आंदोलन कोई राजनीतिक ड्रामा नहीं, बल्कि मुलुंड को बचाने का एक सामूहिक प्रयास है. उन्होंने सभी मुलुंड वासियों से अपील की है कि वे इस आंदोलन से जुड़ें और अपने इलाके की रक्षा करें. इसी के साथ उन्होंने सरकार के समक्ष कुछ मांगें रखी हैं.
ये है मुख्य मांगे

  • केलकर कॉलेज, मुलुंड (पूर्व) के पास बने 7,400 पीएपी फ्लैट्स बाहरी लोगों को देने की बजाय जंगल क्षेत्र से विस्थापित मुलुंड कॉलोनी के उन निवासियों को दिए जाएं, जिन्हें वर्तमान में चारकोप भेजा जा रहा है.
  • डंपिंग ग्राउंड और चेक नाका की जमीन को नागरिकों के लिए एक खुले खेल परिसर और उद्यान में बदला जाए. इसे कंक्रीट के जंगल में न बदला जाए.
  • मुलुंड से विक्रोली तक की साल्ट पैन जमीन को यथावत रखा जाए ताकि पर्यावरण की रक्षा हो और ज्वार के समय मुलुंड में बाढ़ से बचा जा सके.
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