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सिंहस्थ महाकुंभ महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने वाला पर्व : उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

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मुंबई : नाशिक (Nashik) में राष्ट्रपति द्वारा धर्मध्वजारोहण
महाराष्ट्र (Maharashtra) के नाशिक (Nashik) स्थित रामतीर्थ (Ramtirth) और त्र्यंबकेश्वर (Trimbakeshwar) के कुशावर्त तीर्थ (Kushavarta Tirth) पर सिंहस्थ महाकुंभ (Simhastha Mahakumbh) के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) के हाथों ध्वजारोहण और ध्वजपूजन का भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। सायंकाल रामतीर्थ पर आयोजित विशेष कार्यक्रम और गोदा महाआरती (Goda Maha Aarti) के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि यह महाकुंभ केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की प्राणशक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इसके माध्यम से महाराष्ट्र और हिंदू संस्कृति की विविधता का दर्शन पूरी दुनिया को होगा।
समारोह में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा (Jishnu Dev Varma), मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis), उपमुख्यमंत्री सुनेत्री अजित पवार (Sunetra Ajit Pawar), और कुंभमेला मंत्री गिरीश महाजन (Girish Mahajan) उपस्थित रहे। इनके अलावा जगद्गुरु नरेंद्राचार्य (Jagadguru Narendracharya), जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य वल्लभ रायजी महाराज (Jagadguru Shri Vallabhacharya Vallabh Raiji Maharaj), और जगद्गुरु श्री निंबार्काचार्य श्री श्यामशरण देवाचार्यजी महाराज (Jagadguru Shri Nimbarkacharya Shri Shyamsharan Devacharya Ji Maharaj) सहित देशभर के संत-महंत और जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।
नारी शक्ति और सनातन परंपरा का सम्मान
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) द्वारा धर्मध्वजारोहण को सिंहस्थ कुंभ के इतिहास में एक स्वर्णिम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि एक तपस्वी मातृशक्ति के हाथों पवित्र धर्मध्वज फहराया जाना सनातन परंपरा की आदिशक्ति और देश की नारी शक्ति का सर्वोच्च सम्मान है। एक ही समय पर नाशिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ पर धर्मध्वज फहराया जाना अत्यंत विशेष योग है। यह पर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ (Ek Bharat, Shreshtha Bharat) की अवधारणा को साकार करता है।
35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रगति पर
सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान नाशिक-त्र्यंबकेश्वर (Nashik-Trimbakeshwar) में विश्वभर से लगभग 12 करोड़ श्रद्धालुओं और साधु-संतों के आने का अनुमान है। महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) इस विशाल जनसागर के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। क्षेत्र में करीब 35 हजार करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के विकास कार्य चल रहे हैं, जो केवल कुंभ मेले तक सीमित न रहकर क्षेत्र के स्थायी विकास की नींव रखेंगे। कोजागिरी पूर्णिमा (Kojagari Purnima) पर गोदावरी नदी के तट पर हुए सामूहिक शंखनाद को ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ (Guinness Book of World Records) में स्थान मिला है।
आर्थिक और सामाजिक समृद्धि का माध्यम
उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कुंभमेला आम श्रमिकों, स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के लिए रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा। यह आस्था के उत्सव के साथ-साथ आम जनमानस के लिए आर्थिक समृद्धि का भी एक बड़ा माध्यम बनेगा। उन्होंने सिंहस्थ महाकुंभ को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का आदर्श उदाहरण बनाने का आह्वान किया और विश्वास व्यक्त किया कि प्रभु श्रीराम (Lord Shri Ram) तथा माता गोदावरी (Mata Godavari) के आशीर्वाद से यह आयोजन ऐतिहासिक रूप से सफल होगा।

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