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मुंबई में अवैध निर्माणों पर बीएमसी की ढिलाई : 2.14 लाख शिकायतों में से महज 6.15 प्रतिशत मामलों में ही हुआ ध्वस्तीकरण

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मुंबई : महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) मुंबई (Mumbai) को विश्वस्तरीय शहर बनाने का सपना देख रही है। सरकार बार बार मुंबई को झोपड़पट्टी मुक्त (SLUM FREE) करने के संकल्प के साथ डेड लाइन तय करती है लेकिन दूसरी ओर मुंबई महानगरपालिका (Brihanmumbai Municipal Corporation – BMC) के अधिकारी सरकार के मंसूबों पर पानी फेरने का काम करते हैं।
सूचना के अधिकार (Right to Information – RTI) के तहत सामने आई जानकारी के अनुसार, मुंबई (Mumbai) में अवैध निर्माणों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। शहर में अवैध निर्माणों पर रोक लगाने और उन्हें हटाने के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की दर चिंताजनक रूप से काफी कम पाई गई है।
​प्रणाली पर दर्ज शिकायतों और डुप्लीकेट प्रविष्टियों का बड़ा आंकड़ा
​अवैध निर्माणों के खिलाफ नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देने के लिए मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने 1 मार्च 2016 से ऑनलाइन रियल टाइम एन्क्रोचमेंट ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (Real Time Encroachment Tracking and Monitoring System – RETMS) प्रणाली शुरू की थी। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख (Shakeel Ahmad Shaikh) द्वारा मांगी गई जानकारी के उत्तर में जनसूचना अधिकारी तथा सहायक अभियंता (अतिक्रमण निष्कासन), पूर्व उपनगर ने चौंकाने वाले आंकड़े उजागर किए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार 1 मार्च 2016 से 26 अक्टूबर 2026 तक RETMS प्रणाली पर कुल 2,14,917 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 1,16,228 शिकायतों को डुप्लीकेट घोषित कर दिया गया, जिससे वास्तविक शिकायतों की शेष संख्या 98,689 रह गई है।
​नोटिस और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की स्थिति
​महानगरपालिका (BMC) द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि कुल दर्ज शिकायतों में से केवल 13,211 मामलों में ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी हो सकी है, जो कुल शिकायतों का महज 6.15 प्रतिशत है। बीएमसी (BMC) की रिपोर्ट के अनुसार, 60,332 नोटिस तैयार किए गए और 57,521 नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा 31,486 मामलों में कारण बताओ आदेश जारी किए गए और 29,916 मामलों में ध्वस्तीकरण आवश्यक पाया गया। हालांकि, ध्वस्तीकरण के लिए आवश्यक मामलों में से 15,318 मामलों में व्यवस्था करना बाकी है और केवल 1,387 मामलों में व्यवस्था की गई, जबकि अब तक कुल 38,098 शिकायतें बंद की जा चुकी हैं।
​प्रमुख प्रशासनिक विभागों में कार्रवाई का असंतुलन
​रिपोर्ट के अनुसार मुंबई (Mumbai) के प्रमुख प्रशासनिक विभागों में दर्ज शिकायतों और वास्तविक कार्रवाई के बीच भारी अंतर देखने को मिला है। एल (L) विभाग में 30,935 शिकायतें दर्ज की गईं लेकिन केवल 637 ध्वस्तीकरण की कार्रवाइयां हुईं, जबकि के/पूर्व (K/East) विभाग में 24,064 शिकायतों के मुकाबले 1,325 ध्वस्तीकरण किए गए। एम/पूर्व (M/East) विभाग में 14,510 शिकायतों के सापेक्ष सबसे कम केवल 159 ध्वस्तीकरण की कार्रवाइयां की गईं। इसके अलावा पी/दक्षिण (P/South) विभाग में 14,424 शिकायतों पर 1,932 तथा के/पश्चिम (K/West) विभाग में 11,433 शिकायतों के विरुद्ध 1,683 मामलों में ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है।
​न्यायिक सख्ती और प्रशासन की जवाबदेही पर उठे सवाल
​बोरीवली पूर्व (Borivali East) में बेस्ट (BEST) बस डिपो के लिए आरक्षित भूखंड पर अवैध निर्माणों को हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत के निर्देशों का समय पर पालन न होने पर बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े (Ashwini Bhide) के वेतन को लेकर भी कड़े निर्देश जारी किए गए थे, जिसके बाद ही प्रशासन हरकत में आया था। अतीत में कमला मिल कंपाउंड (Kamala Mills Compound), भानु फरसाण मार्ट (Bhanu Farsan Mart), होटल सिटी किनारा (Hotel City Kinara), हुसैनी बिल्डिंग (Hussaini Building – Bhendi Bazaar) और साई सिद्धि बिल्डिंग (Sai Siddhi Building – Ghatkopar) जैसी दुर्घटनाओं में कई नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख (Shakeel Ahmad Shaikh) ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े (Ashwini Bhide) को पत्र भेजकर लंबित मामलों में जल्द ध्वस्तीकरण कराने तथा लापरवाह अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
भ्रष्टाचार है बड़ी वजह
ऐसा पाया गया है कि अवैध निर्माण भ्रष्ट अधिकारियों की साठगांठ से ही किए जाते हैं। स्लम इलाकों में मकानों के निर्माण / मरम्मत की कानूनी अनुमति बीएमसी या कोई भी सरकारी विभाग, (जिसकी जमीन पर स्लम स्थित होती है) नहीं देता। लेकिन जब स्लम में रहनेवाला कोई व्यक्ति अपने मकान की मरम्मत के लिए अधिकारियों से संपर्क करता है तो खासकर बीएमसी अधिकारी उसे अवैध निर्माण के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इसलिए अधिकारी अवैध निर्माणी पर कार्रवाई करने में आनाकानी करते हैं।

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