पुरी : ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में हाल ही में एक ऐसी घटना घटी, जिसने श्रद्धालुओं और ज्योतिषियों के बीच बहस छेड़ दी है। मंदिर के मुख्य गुंबद, जहाँ ‘नीलचक्र’ स्थापित है, के चारों ओर पक्षियों का एक बड़ा झुंड उड़ता हुआ देखा गया। यह दृश्य इसलिए चर्चा में है क्योंकि सामान्यतः नीलचक्र के पास पक्षी नहीं देखे जाते।
दुर्लभ घटना ने खींचा सबका ध्यान
हिंदू मान्यताओं और मंदिर की परंपराओं के अनुसार, जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर किसी पक्षी का बैठना या उड़ना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। जैसे ही यह दृश्य सामने आया, मंदिर के बाहर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक जमा हो गए। सोशल मीडिया पर भी इस घटना के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिससे लोग भविष्य को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जता रहे हैं।
भविष्य मलिका’ और अशुभ संकेतों का डर
इस घटना ने सदियों पुरानी मान्यताओं और ‘भविष्य मलिका’ की भविष्यवाणियों को फिर से चर्चा में ला दिया है। ‘भविष्य मलिका’ के अनुसार, जगन्नाथ मंदिर में होने वाली कोई भी असामान्य हलचल भविष्य की शुभ या अशुभ घटनाओं का संकेत होती है।
लोग इसे पुरानी घटनाओं से जोड़कर देख रहे हैं
अप्रैल 2025 की घटना: 14 अप्रैल 2025 को एक पक्षी मंदिर का धार्मिक ध्वज (पतित पावन बना) लेकर उड़ गया था। इसके ठीक बाद पहलगाम में आतंकी हमला हुआ और ऑपरेशन सिंदूर शुरू करना पड़ा।
पुरानी कड़वी यादें: इससे पहले जब मंदिर के उत्तरी द्वार पर पक्षियों का झुंड दिखा था, तब मंदिर के वरिष्ठ सेवक जगन्नाथ दीक्षित की हत्या और उसके बाद अहमदाबाद में एक विमान हादसा हुआ था। इन्हीं कारणों से स्थानीय लोग और ज्योतिषी इसे किसी बड़ी आपदा की आहट मान रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष: “भयभीत होने की आवश्यकता नहीं”
जहाँ एक ओर लोग इसे शकुन-अपशकुन से जोड़ रहे हैं, वहीं मंदिर प्रशासन ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक घटना है। समुद्र के करीब होने और ठंडी हवाओं के कारण पक्षी अक्सर झुंड में उड़ते हैं।
इसे किसी भी प्रकार की धार्मिक भविष्यवाणी या आपदा से जोड़ना गलत है।
जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी अन्य प्रमुख खबरें
मंदिर प्रशासन और व्यवस्थाओं को लेकर कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सुर्खियों में हैं:
रत्न भंडार का हस्तांतरण:
12वीं सदी के भगवान जगन्नाथ के बहुमूल्य हीरे और जेवरात मरम्मत कार्य के बाद वापस मूल ‘रत्न भंडार’ में स्थानांतरित किए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया के कारण फिलहाल दर्शन व्यवस्था में कुछ बदलाव किए गए हैं।
मोबाइल फोन पर पूर्ण प्रतिबंध: मंदिर की सुरक्षा और मर्यादा बनाए रखने के लिए अब अधिकारियों और सेवादारों के भी मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल ले जाने पर रोक लगा दी गई है।
विवादित वीडियो पर माफी: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शुभंकर मिश्रा ने मंदिर से संबंधित अपने एक विवादास्पद वीडियो को हटा दिया है और इसके लिए बिना शर्त माफी मांगी है।
नए साल से विशेष दर्शन: 1 जनवरी 2025 से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के लिए सुलभ दर्शन हेतु एक नई विशेष व्यवस्था लागू की जाएगी।
संसद में रथ का पहिया: लोकसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव दिया है कि संसद भवन में भगवान जगन्नाथ के रथ का एक पहिया (नंदीघोष रथ का चक्र) स्थापित किया जाए।
विज्ञान और विश्वास में द्वंद्व
जगन्नाथ पुरी आस्था का ऐसा केंद्र है, जहाँ विज्ञान और विश्वास अक्सर आमने-सामने होते हैं। प्रशासन भले ही इसे प्राकृतिक कहे, लेकिन भक्तों की श्रद्धा इसे महाप्रभु के किसी बड़े संकेत के रूप में ही देख रही है।

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