मुंबई : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के तीन प्रमुख पुनर्विकास क्लस्टर क्षेत्रों के लिए महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) ने डेवलपर्स का चयन कर लिया है। वर्ली के आदर्श नगर और बांद्रा रिक्लेमेशन परियोजनाओं की जिम्मेदारी अडानी प्रॉपर्टीज को मिली है, जबकि अंधेरी पश्चिम स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल (एसवीपी) नगर के पुनर्विकास का काम जेएसडब्ल्यू स्टील के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को सौंपा गया है।
206 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए निकाली गई थी निविदा
म्हाडा ने 8 अप्रैल को मुंबई के तीन प्रमुख क्षेत्रों—आदर्श नगर (वर्ली), बांद्रा रिक्लेमेशन और एसवीपी नगर (अंधेरी पश्चिम)—के क्लस्टर पुनर्विकास के लिए निविदाएं जारी की थीं। इन तीनों परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल 206.49 एकड़ है। तकनीकी निविदाएं 20 मई को खोली गई थीं और मंगलवार को विजेता कंपनियों के नाम घोषित किए गए।
आदर्श नगर और बांद्रा रिक्लेमेशन में अडानी सबसे आगे
म्हाडा के अधिकारियों के अनुसार, आदर्श नगर और बांद्रा रिक्लेमेशन दोनों परियोजनाओं के लिए अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी रही। इन दोनों परियोजनाओं के लिए अडानी के अलावा लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड और जेएसडब्ल्यू रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड भी प्रतिस्पर्धा में शामिल थे।
एसवीपी नगर परियोजना जेएसडब्ल्यू कंसोर्टियम के नाम
अंधेरी पश्चिम स्थित 73.89 एकड़ क्षेत्र में फैले एसवीपी नगर के पुनर्विकास का ठेका जेएसडब्ल्यू स्टील के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को मिला है। इस कंसोर्टियम में हनुरा रियल्टी (जेएसडब्ल्यू स्टील की सहायक कंपनी), चंदक रियल्टर्स, प्रेमसागर इंफ्रा रियल्टी और वांटियर रियल्टी शामिल हैं। एसवीपी नगर परियोजना के लिए रिलायंस 4आईआर रियल्टी डेवलपमेंट लिमिटेड, अडानी प्रॉपर्टीज और हनुरा रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड के बीच मुकाबला था।
हाई-पावर कमेटी और राज्य सरकार की मंजूरी बाकी
म्हाडा द्वारा चयनित कंपनियों के प्रस्ताव अब इन परियोजनाओं के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति (हाई-पावर कमेटी) के समक्ष रखे जाएंगे। समिति की मंजूरी मिलने के बाद अंतिम स्वीकृति के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे जाएंगे।
निवासियों की याचिका पर 9 जून को सुनवाई
इन परियोजनाओं की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब तीनों क्षेत्रों के निवासी समूह और हाउसिंग सोसायटियां क्लस्टर पुनर्विकास निविदा प्रक्रिया को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 9 जून को निर्धारित है। निवासियों ने आरोप लगाया है कि म्हाडा ने पुनर्विकास प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती और कई मामलों में आवश्यक सहमति (कंसेंट) की शर्तों का पालन नहीं किया गया। कुछ निवासी संगठनों ने प्रक्रिया को दबावपूर्ण और गैर-लोकतांत्रिक भी बताया है।
पुनर्विकास के दौरान मिलेगा किराया और कॉर्पस फंड
म्हाडा ने स्पष्ट किया है कि पुनर्विकास अवधि के दौरान पात्र निवासियों को ट्रांजिट किराया दिया जाएगा। इसके अलावा भवनों के रखरखाव के लिए कॉर्पस फंड की भी व्यवस्था की जाएगी। बांद्रा रिक्लेमेशन परियोजना 98.27 एकड़, एसवीपी नगर 73.89 एकड़ और आदर्श नगर 34.33 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मुंबई के इन प्रमुख इलाकों का व्यापक कायाकल्प होने की उम्मीद है।
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