मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई शहर और उपनगर की सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं को बड़ी राहत दी है। 99 साल की लीज वाली जमीनों पर स्टांप शुल्क में भारी कटौती की गई है। साथ ही वर्ग-2 से वर्ग-1 में जमीन बदलने के नियम भी आसान कर दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे मुंबई और एमएमआर क्षेत्र की लाखों सोसायटियों को फायदा मिलेगा।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने विधानसभा में बताया कि अब 99 साल की लीज वाली आवासीय संपत्तियों पर अधिकतम 0.5 प्रतिशत और व्यावसायिक संपत्तियों पर 1.5 प्रतिशत स्टांप शुल्क लगेगा। इससे पहले बाजार मूल्य के आधार पर बहुत अधिक शुल्क देना पड़ता था।
कई सोसायटियों को करोड़ों रुपए की बचत
सरकार के अनुसार मित्तल चैंबर्स ऑनर को ऑप सोसायटी (Mittal Chambers Owners Co-op Society) का स्टांप शुल्क 101.21 करोड़ रुपए से घटकर 10.68 लाख रुपए हो गया है। न्यू मेकर्स चैंबर (New Makers Chamber) का शुल्क 119.47 करोड़ रुपए से घटकर 1.76 करोड़ रुपये रह गया। सी लॉट को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (Sea Lot Co-operative Housing Society) और अभिलाषा परिसर सोसायटी (Abhilasha Premises Society) को भी बड़ी राहत मिली है। इसका लाभ नरीमन पॉइंट, कफ परेड, कुलाबा, मरीन ड्राइव और उपनगरों की सोसायटियों को मिलेगा।
वर्ग-2 से वर्ग-1 में बदलाव आसान
सरकार ने वर्ग-2 से वर्ग-1 में जमीन बदलने के नियम भी सरल करने का फैसला किया है। अब 100 प्रतिशत की जगह 60 प्रतिशत निवासियों की सहमति पर्याप्त होगी। इससे पुनर्विकास की अटकी परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
बीबीडी रिक्लेमेशन को भी राहत
सरकार ने 2015 से पहले बी. बी. डी. रिलेमेशन (BBD Reclamation) में हुए सदनिका हस्तांतरण पर लगने वाला नजराना पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है। इससे 91 संपत्तियों और करीब 1,500 सदनिकाधारकों को लाभ मिलेगा।

मुंबई शहर, उपनगर सहित एमएमआर क्षेत्र को मिलेगा लाभ
99 साल की लीज वाली सोसायटियों का स्टांप शुल्क काफी कम हो जाएगा।
करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ खत्म होगा।
वर्ग-2 से वर्ग-1 में जमीन बदलने की प्रक्रिया आसान होगी।
अब केवल 60 प्रतिशत सदस्यों की सहमति से प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
पुनर्विकास (Redevelopment) परियोजनाओं में आने वाली अड़चनें कम होंगी। नरीमन पॉइंट, कफ परेड, कुलाबा, मरीन ड्राइव सहित मुंबई शहर, उपनगर और पूरे एमएमआर क्षेत्र की हजारों सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं तथा लाखों सदनिकाधारकों को सीधा लाभ मिलेगा।

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