मुंबई : महाबलेश्वर (Mahabaleshwar) और माथेरान (Matheran) की इको सेंसिटिव जमीनों पर अवैध निर्माण और पट्टा शर्तों के उल्लंघन के मामलों पर महाराष्ट्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी के तहत इन जमीनों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। यह जानकारी राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने विधान परिषद में दी।
उच्चस्तरीय समिति करेगी जांच
चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए कोंकण विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। समिति महाबलेश्वर और माथेरान में पट्टा शर्तों के उल्लंघन, अवैध निर्माण और पर्यावरण को हुए नुकसान की जांच करेगी। इसकी रिपोर्ट अगले विधानसभा सत्र में पेश की जाएगी।
महाबलेश्वर का फैसला पहले ही रद्द
सरकार ने महाबलेश्वर की 26 लीज जमीनों को वर्ष 2022 में वर्ग-2 से वर्ग-1 (फ्री होल्ड) करने का विवादित निर्णय पहले ही रद्द कर दिया है। इस मामले की सुनवाई फिलहाल उच्च न्यायालय में चल रही है और अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को होगी। सरकार ने कहा कि इन सरकारी जमीनों को निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।
तीन महीने में पूरी होगी जांच
राजस्व मंत्री ने कहा कि महाबलेश्वर और माथेरान में तीन महीने के भीतर जांच पूरी की जाएगी। वन एवं पर्यावरण नीति के अनुसार यह तय किया जाएगा कि किन अवैध निर्माणों को हटाया जाए और किन मामलों में अनुमति दी जा सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इको सेंसिटिव क्षेत्रों में किसी भी अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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